मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध अब वैश्विक संकट में बदलता नजर आ रहा है। ईरान, इजराइल और अन्य देशों के बीच बढ़ते हमलों से हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। इसी बीच कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिससे पूरी दुनिया में आर्थिक दबाव बढ़ने लगा है। ईरान ने साफ कहा है कि उसने युद्ध की शुरुआत नहीं की, लेकिन अपने ऊपर हुए हमलों का कड़ा जवाब देगा। ईरानी राष्ट्रपति ने बयान दिया कि देश किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। साथ ही ईरान ने हाल ही में हुए स्कूल हमले को लेकर अमेरिका और इजराइल से मुआवजे की मांग करने की बात भी कही है। वहीं अमेरिका की तरफ से सीधे युद्ध में उतरने की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हालात पर करीबी नजर रखी जा रही है। डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के सुप्रीम लीडर की स्थिति को लेकर अनिश्चितता जताई, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया है। इजराइल लगातार लेबनान और आसपास के इलाकों में एयरस्ट्राइक कर रहा है, जबकि हिजबुल्लाह भी जवाबी हमले कर रहा है। इस बीच UAE के फुजैराह पोर्ट के पास ऑयल टैंकर पर हमला और ड्रोन अटैक ने समुद्री सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। युद्ध का सबसे बड़ा असर तेल बाजार पर पड़ा है। दुबई और ओमान का कच्चा तेल रिकॉर्ड कीमत पर पहुंच गया है, जिससे दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की आशंका बढ़ गई है। एशियाई देशों पर इसका असर ज्यादा दिख रहा है, जहां सरकारें अब वैकल्पिक तेल सप्लाई की तलाश में जुट गई हैं। असर क्या होगा: पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं महंगाई में तेजी आएगी फ्लाइट और ट्रांसपोर्ट महंगे होंगे ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता बढ़ेगी Post navigation ईरान-इजराइल जंग का 14वां दिन: अमेरिकी टैंकर विमान क्रैश, 4 क्रू मेंबर्स की मौत हेडलाइन | F-35 पर हमला! ईरान का बड़ा दावा, अमेरिका को भारी नुकसान