नई दिल्ली। शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए वैज्ञानिकों से जमीन से जुड़े और व्यावहारिक समाधान विकसित करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि रिसर्च ऐसी होनी चाहिए जिससे किसानों की आय बढ़े, उनकी आजीविका सुरक्षित हो और देश में पौष्टिक व प्राकृतिक खेती को बढ़ावा मिले।

एग्रोनॉमी कांग्रेस में रखी प्राथमिकताएं
छठे इंटरनेशनल एग्रोनॉमी कांग्रेस (IAC-2025) के उद्घाटन अवसर पर मंत्री ने बीज की खराब गुणवत्ता, मिलावटी कृषि इनपुट, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, दाल और तिलहन उत्पादन बढ़ाने, फसलों पर वायरस हमले, मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन की कमी और धान की डायरेक्ट सीडिंग से जुड़ी चुनौतियों को प्रमुख मुद्दा बताया। उन्होंने इन समस्याओं के समाधान के लिए शोध को प्राथमिकता देने की बात कही।

टेक्नोलॉजी से बदलेगी खेती की तस्वीर
कृषि मंत्री ने कहा कि मशीनीकरण, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्मार्ट एग्रीकल्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसे आधुनिक साधनों का लाभ किसानों तक पहुंचाना जरूरी है। साथ ही कार्बन क्रेडिट, पानी बचाने वाली तकनीक और फसलों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने पर काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को धीरे-धीरे कम करने पर भी जोर दिया।

सस्टेनेबल खेती पर जोर
तीन दिवसीय IAC-2025 कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऐसी कृषि प्रणाली को बढ़ावा देना है जो किसानों की आय के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी सुनिश्चित करे। इस पहल के जरिए भारत को क्लाइमेट-स्मार्ट और आधुनिक एग्री-फूड सिस्टम में अग्रणी बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

रबी फसलों का रकबा बढ़ने की उम्मीद
कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि इस साल रबी फसलों का बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष के 655.88 लाख हेक्टेयर से अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि अधिक बारिश और कुछ क्षेत्रों में देरी के बावजूद बुवाई का आंकड़ा बेहतर है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 17 नवंबर तक गेहूं की बुवाई 66.23 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है, जो पिछले साल 56.55 लाख हेक्टेयर थी। दलहन का क्षेत्रफल बढ़कर 52.82 लाख हेक्टेयर और तिलहन का क्षेत्र 15.53 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है। कुल मिलाकर रबी फसलों की बुवाई 208.19 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 188.73 लाख हेक्टेयर से अधिक है।

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