बिलासपुर | पॉक्सो एक्ट और अपहरण के एक अहम मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी युवक को बरी कर दिया। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया।


क्या था मामला

कबीरधाम निवासी दीपक वैष्णव पर आरोप था कि उसने एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अपने साथ ले जाकर शारीरिक संबंध बनाए।
मामले में ट्रायल कोर्ट (पॉक्सो कोर्ट, मुंगेली) ने आरोपी को आईपीसी की धारा 363, 366 और पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी मानते हुए 20 साल की सजा सुनाई थी।


हाईकोर्ट ने क्यों पलटा फैसला

हाईकोर्ट ने केस की विस्तृत समीक्षा के बाद कई अहम तथ्य सामने रखे:

  • पीड़िता और आरोपी के बीच पहले से मोबाइल पर बातचीत होती थी
  • पीड़िता खुद आरोपी के साथ अपनी इच्छा से गई थी
  • दोनों करीब एक महीने तक साथ रहे और कई शहरों (मुंगेली, रायपुर, हैदराबाद, विजयवाड़ा) में घूमे
  • इस दौरान पीड़िता ने कहीं भी विरोध या शिकायत नहीं की
  • मेडिकल जांच में शरीर पर कोई चोट नहीं मिली
  • एफएसएल रिपोर्ट भी नेगेटिव रही
  • यौन संबंध का कोई ठोस चिकित्सीय प्रमाण नहीं मिला

कोर्ट की अहम टिप्पणी

कोर्ट ने कहा:

  • सिर्फ साथ जाना अपराध नहीं माना जा सकता
  • जब तक यह साबित न हो कि आरोपी ने लड़की को बहकाया या दबाव डाला
  • परिस्थितियां जबरदस्ती या शोषण को साबित नहीं करतीं

हालांकि पीड़िता नाबालिग (करीब 15 साल 10 माह) थी, लेकिन कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध सबूतों के आधार पर जबरन या शोषण साबित नहीं हो पाया।


सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

हाईकोर्ट ने S. Varadarajan vs State of Madras और Tilku alias Tilak Singh vs State of Uttarakhand का हवाला देते हुए कहा कि:

  • 16-18 वर्ष के बीच की उम्र में लड़की में सही-गलत समझने की क्षमता होती है
  • यदि लड़की अपनी मर्जी से जाती है और कोई दबाव नहीं है, तो किडनैपिंग नहीं मानी जाएगी

अंतिम फैसला

हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए आरोपी दीपक वैष्णव को सभी आरोपों से बरी कर दिया और संदेह का लाभ देते हुए राहत दी।

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