धमतरी में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: सड़क, बिजली और पुल-पुलिया की मांग को लेकर हजारों ग्रामीणों ने किया कलेक्ट्रेट घेराव, प्रशासन अलर्ट धमतरी | JOHARPOST.IN छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया। सड़क, बिजली, पुल-पुलिया और अन्य विकास कार्यों की मांग को लेकर कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीण सोमवार को कलेक्ट्रेट घेराव करने धमतरी पहुंचे। हालांकि प्रशासन ने उन्हें कलेक्ट्रेट पहुंचने से पहले ही रोक दिया, जिसके बाद ग्रामीण सड़क पर बैठकर प्रदर्शन करने लगे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन पहले से अलर्ट मोड पर था। प्रदर्शन के मद्देनजर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। देखिए इन लोगों ने क्या कहा… सिरधन सोम, जनपद सदस्य (ग्रामीण) ,जय नेताम, जिला पंचायत सदस्य (गरियाबंद), मनोज साक्षी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य: आदिवासी आंदोलन से हिल गया धमतरी, प्रशासन की नाकेबंदी रही बेअसर, हजारों ग्रामीणों ने सरकार के विकास दावों पर उठाए सवाल #Dhamtari #AdivasiAndolan #Chhattisgarh #DhamtariNews #VillageProtest #CollectorateGherao #CGNews #JoharPost #BreakingNews #AdivasiNews pic.twitter.com/OzLDWEgmTh— JOHARPOST.IN (@johar_post) June 22, 2026 कई गांवों से उमड़ा जनसैलाब इस आंदोलन में रिसगांव, खल्लारी, ठेनही, मेचका, अरसीकन्हार समेत दर्जनों गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे वर्षों से अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन के सामने आवाज उठाते आ रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि विकास योजनाओं की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका लाभ गांवों तक नहीं पहुंच पा रहा है। सड़क, बिजली और पुल-पुलिया के अभाव में बदहाल जीवन ग्रामीणों ने बताया कि उनके क्षेत्रों में आज भी सड़क, बिजली और पुल-पुलिया जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। बरसात के दिनों में हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं। कई गांव नदी-नालों में बाढ़ आने के कारण पूरी तरह कट जाते हैं और टापू जैसी स्थिति बन जाती है। ऐसे समय में मरीजों, गर्भवती महिलाओं और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति की अगुवाई में आंदोलन ग्रामीणों के इस आंदोलन का नेतृत्व जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति ने किया। समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में ग्रामीण एकजुट होकर अपने अधिकारों और विकास कार्यों की मांग को लेकर सड़क पर उतरे। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। कलेक्टर पहुंचे मौके पर, सुनी ग्रामीणों की समस्याएं धमतरी में आदिवासी समाज का शक्ति प्रदर्शन, प्रशासन अलर्ट#Dhamtari #AdivasiAndolan #Chhattisgarh #DhamtariNews #VillageProtest #CollectorateGherao #CGNews #JoharPost #BreakingNews #AdivasiNews pic.twitter.com/SSRGEjABqi— JOHARPOST.IN (@johar_post) June 22, 2026 प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कलेक्टर अविनाश मिश्रा सहित प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान ग्रामीणों ने एक-एक कर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। कलेक्टर ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जो कार्य प्रशासनिक स्तर पर संभव हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर पूरा कराया जाएगा। आश्वासन के बाद प्रशासनिक अधिकारी वापस लौट गए, लेकिन खबर लिखे जाने तक प्रदर्शन जारी था। यूएसटीआर अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के विकास कार्यों में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (USTR) के अधिकारी और कर्मचारी लगातार बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि टाइगर रिजर्व का हवाला देकर प्रधानमंत्री आवास योजना, पुल-पुलिया निर्माण और अन्य विकास कार्यों को प्रभावित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इसे अपने मौलिक अधिकारों का हनन बताते हुए कहा कि इसी वजह से क्षेत्र का विकास वर्षों से रुका हुआ है। रेंजर को हटाने की मांग प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने संबंधित क्षेत्र के एक रेंजर पर जातिगत टिप्पणी करने का आरोप लगाया और उसे तत्काल हटाने की मांग की। इस मामले में कलेक्टर ने जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सुरक्षा के कड़े इंतजाम आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए धमतरी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। जिला पुलिस के अलावा रायपुर, गरियाबंद और महासमुंद से अतिरिक्त पुलिस बल भी बुलाया गया था। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। पढ़िए क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण धमतरी के ग्रामीणों का यह आंदोलन केवल सड़क, बिजली और पुल-पुलिया की मांग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वर्षों से लंबित विकास कार्यों और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश का संकेत है। यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है। साथ ही टाइगर रिजर्व क्षेत्रों में विकास और संरक्षण के बीच संतुलन को लेकर भी यह मुद्दा नई बहस को जन्म दे सकता है। Post navigation विधायक भावना बोहरा और सभापति रवि शंकर चंद्रवंशी के प्रयास रंग लाए, चारभाठा खुर्द में लगा 100 केवीए ट्रांसफार्मर नाले में मिली 18 वर्षीय युवती की लाश, घर से निकली थी बिना बताए… इलाके में फैली सनसनी, जांच में जुटी पुलिस