उपभोक्ताओं ने बिल बढ़ने की शिकायतें उठाईं, बिजली कंपनी ने कहा- स्मार्ट मीटर खपत नहीं बढ़ाता

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर पर विवाद, बंद फ्लैट का 32 हजार बिल जांच के बाद 26 रुपये हुआ

छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें बढ़ रही हैं। रायपुर में बंद फ्लैट का 32 हजार रुपये का बिल जांच के बाद 26 रुपये हुआ।

छत्तीसगढ़ स्मार्ट मीटर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट बिजली मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की नाराजगी लगातार सामने आ रही है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कुछ उपभोक्ताओं ने नए मीटर लगने के बाद बिजली बिल में अचानक बढ़ोतरी होने का दावा किया है। कई लोगों का कहना है कि पहले जहां उनका बिल सीमित रहता था, वहीं स्मार्ट मीटर लगने के बाद राशि कई गुना अधिक दिखाई दे रही है।

इसी बीच रायपुर के भावना नगर से सामने आया एक मामला स्मार्ट मीटर और बिलिंग व्यवस्था को लेकर चर्चा का विषय बन गया है। यहां एक ऐसे फ्लैट का बिजली बिल हजारों रुपये में पहुंच गया, जिसके लंबे समय से बंद रहने की बात सामने आई। शिकायत और जांच के बाद बिल की राशि में बड़ा संशोधन किया गया।

बंद फ्लैट में आया पहले 15 हजार, फिर 32 हजार रुपये का बिल

भावना नगर निवासी मनीष शर्मा ने एक फ्लैट खरीदा था। उनके मुताबिक फ्लैट में लंबे समय से कोई नहीं रह रहा था और वहां बिजली के सामान्य उपकरण भी इस्तेमाल नहीं किए जा रहे थे। इसके बावजूद मई महीने में करीब 15,500 रुपये का बिजली बिल जारी हुआ।

मामला यहीं नहीं रुका। जून महीने में बिल की राशि करीब 32 हजार रुपये तक पहुंच गई। बंद पड़े फ्लैट में इतनी बड़ी राशि का बिल आने के बाद उपभोक्ता ने बिजली कंपनी में शिकायत की और बिल की जांच की मांग की।

बाद में यह मामला सामने आने और जांच होने के बाद बिजली बिल में संशोधन किया गया। संशोधन के बाद उपभोक्ता के लिए देय राशि महज 26 रुपये रह गई।

इस मामले ने यह सवाल जरूर खड़ा किया कि आखिर ऐसी स्थिति में बिल इतना अधिक कैसे तैयार हुआ और शिकायत सामने आने के बाद उसमें इतनी बड़ी कमी किस वजह से हुई।

रायपुर के अलावा दूसरे जिलों से भी शिकायतें

स्मार्ट मीटर को लेकर ऐसी शिकायतें केवल रायपुर तक सीमित नहीं बताई जा रही हैं। दुर्ग, बिलासपुर, कबीरधाम समेत प्रदेश के दूसरे हिस्सों से भी उपभोक्ताओं द्वारा बिल बढ़ने की शिकायतें किए जाने की बात सामने आ रही है।

कुछ उपभोक्ताओं का दावा है कि स्मार्ट मीटर लगने से पहले उनका मासिक बिजली खर्च करीब 1,800 से 2,000 रुपये के आसपास रहता था। इसके बाद कुछ मामलों में यही राशि 4,000 से 6,000 रुपये या उससे अधिक पहुंचने का दावा किया गया है।

हालांकि इन सभी मामलों में बढ़े हुए बिल का कारण केवल स्मार्ट मीटर ही है, ऐसा निष्कर्ष जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता। बिजली की वास्तविक खपत, इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण, बिलिंग अवधि और लागू टैरिफ जैसे कई कारक अंतिम बिल को प्रभावित करते हैं।

बिजली कंपनी ने दावों पर क्या कहा?

उपभोक्ताओं की शिकायतों के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड यानी CSPDCL का कहना है कि स्मार्ट मीटर बिजली की खपत नहीं बढ़ाता। कंपनी के अनुसार मीटर का काम वास्तविक खपत को रिकॉर्ड करना है और उसी के आधार पर बिल तैयार होता है।

कंपनी का तर्क है कि किसी उपभोक्ता का बिल बढ़ने के पीछे उसकी वास्तविक खपत में बदलाव, टैरिफ स्लैब में परिवर्तन या पहले की तुलना में अधिक सटीक रीडिंग जैसे कारण हो सकते हैं।

कंपनी की ओर से यह भी बताया गया है कि तीन शहरों में किए गए सर्वे में स्मार्ट मीटर के कारण बिजली की अतिरिक्त खपत होने का प्रमाण नहीं मिला।

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