बिलासपुर: बुधवार को अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने यूजीसी के नए नियमों और देश की राजनीति को लेकर तीखा बयान दिया। बेमेतरा से लौटते वक्त बिलासपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने केंद्र और राज्य की सत्तारूढ़ सरकारों पर गंभीर आरोप लगाए।

उन्होंने University Grants Commission (UGC) के नए नियमों को लेकर कहा कि यह कानून हिंदुओं को बांटने वाला है और इसे लागू करना देशहित में नहीं है। शंकराचार्य ने इसे ‘राष्ट्रद्रोह’ तक करार देते हुए कहा कि ऐसे नियम समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं और इसके खिलाफ आवाज उठाना जरूरी है।

शंकराचार्य ने Yogi Adityanath पर भी सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को खुद को साबित करने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, लेकिन वे इसमें सफल नहीं हुए। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि योगी ‘असली हिंदू नहीं’ हैं।

राजनीतिक दलों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उनकी आवाज को दबाने के लिए हिस्ट्रीशीटरों का सहारा लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकारें गौ रक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर गंभीर नहीं हैं और इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

सनातन धर्म को लेकर उन्होंने कहा कि इसे बाहरी लोगों से कोई खतरा नहीं है, बल्कि अंदर ही मौजूद ‘कालनेमियों’ से खतरा है। उन्होंने कहा कि आज की राजनीति में हिंदुओं के हितों से ज्यादा वोट बैंक की राजनीति की जा रही है, जो चिंता का विषय है।


UGC नियमों पर विवाद: क्या हैं मुख्य आपत्तियां?

यूजीसी के नए नियमों को लेकर देशभर में विरोध देखने को मिल रहा है, खासतौर पर सवर्ण वर्ग के छात्रों और शिक्षकों के बीच।

1. झूठी शिकायत पर सजा का प्रावधान हटाया गया
ड्राफ्ट नियमों में झूठी शिकायत दर्ज कराने पर सजा का प्रावधान था, लेकिन अंतिम नियमों में इसे हटा दिया गया। विरोध करने वालों का कहना है कि इससे फर्जी जातिगत भेदभाव के मामलों में बढ़ोतरी हो सकती है।

2. जनरल कैटेगरी को सूची से बाहर रखना
नियमों में जातिगत भेदभाव के शिकार के रूप में केवल SC, ST और OBC वर्गों का ही उल्लेख किया गया है। सवर्ण वर्ग का तर्क है कि इससे यह संदेश जाता है कि भेदभाव केवल इन्हीं वर्गों के साथ होता है, जबकि वास्तविकता में भेदभाव किसी के साथ भी हो सकता है।


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