सदियों पुरानी धरोहर पर प्रदूषण का संकट, हजारों मछलियों की मौत से मचा हड़कंप
पी.डी. मानिकपुरी की रिपोर्ट

पंडरिया। ऐतिहासिक धरोहरों के लिए पहचाना जाने वाला पंडरिया आज अपने ही प्राचीन जलस्रोत—बांधा तालाब—को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। कभी शहर की जीवनरेखा और मछुआरों की आजीविका का मुख्य केंद्र रहा यह तालाब अब दूषित पानी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते अपने अस्तित्व को खोने की कगार पर पहुंच गया है।


स्थिति भयावह: रोज मिल रही हजारों मरी मछलियां

तालाब की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से तालाब के किनारों पर बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियां दिखाई दे रही हैं। पानी की सतह पर सड़ती मछलियां तैर रही हैं, जिससे पूरे इलाके में असहनीय दुर्गंध फैल गई है।

स्थानीय निवासी मोटू निषाद बताते हैं,

“पहले कुछ मछलियां मर रही थीं, लेकिन अब तो हर सुबह यह संख्या बढ़ते जा रही हैं। पानी का रंग बदल गया है और उसमें तेज बदबू आने लगी है।”



प्रदूषण की जड़: घरों का गंदा पानी सीधे तालाब में

शहर की बढ़ती आबादी और अव्यवस्थित विकास इस संकट की सबसे बड़ी वजह बनकर सामने आया है। घरों से निकलने वाला गंदा और अपशिष्ट जल बिना किसी ट्रीटमेंट के सीधे तालाब में बहाया जा रहा है। इससे तालाब का पानी तेजी से जहरीला होता जा रहा है, जिससे जलीय जीवों का जीवन खतरे में पड़ गया है।


निस्तारी तालाब पर खतरा: लोगों की सेहत दांव पर

बांधा तालाब केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि शहर का प्रमुख निस्तारी तालाब भी है। यहां के पानी का उपयोग आज भी बड़ी संख्या में लोग नहाने और दैनिक कार्यों के लिए करते हैं। ऐसे में दूषित पानी सीधे लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है।

तालाब के किनारों पर फैला प्लास्टिक कचरा और सड़ांध भरा पानी वातावरण को और अधिक जहरीला बना रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा लगातार बढ़ रहा है।


स्वास्थ्य विशेषज्ञ की चेतावनी: फैल सकती हैं गंभीर बीमारियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. राकेश प्रेमी ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए चेतावनी दी है कि मरी हुई मछलियां और दूषित पानी बैक्टीरिया और वायरस के पनपने का बड़ा केंद्र बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि इससे हैजा, टाइफाइड, त्वचा रोग और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण जैसी जल-जनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है, खासकर बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों के लिए।


जनप्रतिनिधि का आरोप: प्रशासन बेखबर

वार्ड मेंबर अनुराग ठाकुर का कहना है कि तालाब में लगातार बह रहा अपशिष्ट जल ही इस भयावह स्थिति का मुख्य कारण है।
उन्होंने बताया,

“तालाब की सफाई और संरक्षण को लेकर कई बार नगरीय प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।”


सवालों के घेरे में प्रशासन

  • क्या मकानों को अनुमति देते समय नाली व्यवस्था सुनिश्चित की गई थी?
  • गंदे पानी को तालाब में जाने से रोकने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए?
  • क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही प्रदूषण के स्रोत को रोका नहीं गया और तालाब की सफाई नहीं की गई, तो यह समस्या आने वाले समय में बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले सकती है।


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