पखांजूर/गढ़चिरौली।महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से नक्सल विरोधी अभियान में सुरक्षा बलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से सक्रिय 11 इनामी नक्सलियों ने पुलिस और सीआरपीएफ के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। इन सभी पर मिलाकर 68 लाख रुपये का इनाम घोषित था। संगठन के अहम पदों पर थे सक्रियअधिकारियों के मुताबिक सरेंडर करने वालों में संगठन के कई जिम्मेदार पदों पर काम कर रहे सदस्य शामिल हैं। इनमें डिवीजन स्तर का एक सदस्य, क्षेत्रीय कमेटी का एक सचिव, एक कमांडर, एक पीपीसीएम, एक सहायक कमेटी सदस्य और अन्य सक्रिय कैडर शामिल हैं। ये सभी लंबे समय से नक्सली गतिविधियों में संलिप्त थे और सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बने हुए थे। अभियान का असर, लगातार घट रही नक्सली ताकतसरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2025 से अब तक 123 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। वहीं, 2005 से अब तक कुल 794 उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि अब गढ़चिरौली में नक्सलियों की गतिविधियां सीमित होकर मुख्यतः भामरागढ़ इलाके तक सिमट गई हैं। पहले भी हो चुका है बड़ा सरेंडरइससे पहले अक्टूबर 2025 में शीर्ष माओवादी नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ सोनू के साथ 61 नक्सलियों ने हथियारों सहित आत्मसमर्पण किया था। उस घटना को दंडकारण्य क्षेत्र में नक्सल आंदोलन के लिए बड़ा झटका माना गया था। इन नक्सलियों ने छोड़ा हिंसा का रास्ताआत्मसमर्पण करने वालों में सोनी उर्फ बाली मट्टामी, बुदरी उर्फ रामबत्ती मट्टामी, सुखलाल कोक्सा, शांति तेलामी और यमुनक्का पेंदाम सहित कुल 11 लोग शामिल हैं। इनमें कई लंबे समय से वांछित सूची में थे। सरकार देगी आर्थिक सहायता और पुनर्वाससरेंडर करने वाले नक्सलियों को शासन की पुनर्वास नीति के तहत आर्थिक और सामाजिक सहायता दी जाएगी। पात्रता के अनुसार 4 लाख से 8.5 लाख रुपये तक की मदद, सामूहिक आत्मसमर्पण पर अतिरिक्त 10 लाख रुपये और दंपत्ति के रूप में सरेंडर करने वालों को 1.5 लाख रुपये की अतिरिक्त राशि देने का प्रावधान है। Post navigation खास रिपोर्ट | पंडरिया का बांधा तालाब बना ‘जहर का कुंड’ रायपुर में चलती कार में लगी भीषण आग, धुएं के गुबार और उठती लपटों का वीडियो आया सामने