सब्जियों की बाड़ी में छिपाकर उगाई जा रही थी अफीम, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर फसल की पहचान कर की नष्ट कार्रवाई

रायगढ़। छत्तीसगढ़ में अवैध अफीम की खेती के मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। ताजा मामला जिले के लैलूंगा क्षेत्र के घटगांव गांव से सामने आया है, जहां सब्जियों की आड़ में अफीम की फसल उगाई जा रही थी। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई। खेत में लगी फसल को चिन्हित कर नष्ट करने की कार्रवाई भी की गई।

सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में झारखंड से जुड़े एक व्यक्ति की भूमिका सामने आ रही है, जो कई वर्षों से खेती के नाम पर इस क्षेत्र में सक्रिय था। उसने स्थानीय किसानों से जमीन लेकर दूसरी फसलों की आड़ में प्रतिबंधित खेती शुरू की। बताया जा रहा है कि वह पहले से इस तरह के अवैध कार्यों में शामिल रहा है और उसी तर्ज पर यहां भी काम कर रहा था।

प्रदेश में हाल के दिनों में सामने आए मामलों पर नजर डालें तो स्थिति और भी चिंताजनक नजर आती है। 7 मार्च को दुर्ग जिले के समोदा क्षेत्र में भाजपा नेता विनायक ताम्रकर के खेत से करीब 7.88 करोड़ रुपये की अफीम जब्त की गई थी। इसके बाद 10 मार्च को बलरामपुर के कुसमी क्षेत्र में बड़े रकबे में अवैध फसल मिलने पर कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। 12 मार्च को बलरामपुर के ही एक अन्य गांव में अलग-अलग किसानों की जमीन पर अफीम की खेती पकड़ी गई। वहीं 20 मार्च को रायगढ़ के तमनार इलाके में भी अवैध फसल को नष्ट किया गया था।

भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सरकार पर तीखा हमला बोला है।

अपने पोस्ट में बघेल ने लिखा कि “सुशासन अफ़ीम – लैलूंगा ब्रांच” के नाम पर रायगढ़ जिले के लैलूंगा क्षेत्र के नवीन घटगांव में एक या दो नहीं बल्कि तीन अलग-अलग खेतों में अफीम की खेती पाई गई है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब तो ऐसा लग रहा है कि भाजपा को अपना चुनाव चिन्ह “कमल का फूल” बदलकर “अफीम का फूल” कर लेना चाहिए।

देखें कैसे सब्जी की बाड़ी में उगाई जा रही थी अफीम

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