तीन साल तक स्टे का लाभ लेने वाले कर्मचारी को कोर्ट की दोटूक—पुराने आदेश पर आपत्ति नहीं तो नए ट्रांसफर पर चुनौती भी मान्य नहीं बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने ट्रांसफर से जुड़े एक अहम मामले में स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी ने अपने पहले तबादले पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, तो वह बाद में उसी आधार पर नए ट्रांसफर आदेश को चुनौती नहीं दे सकता। अदालत ने इसी सिद्धांत के आधार पर दायर याचिका को खारिज कर दिया। क्या है पूरा मामला?अशोक कुमार सिंह, जो नगर निगम चिरमिरी में सब-इंजीनियर के पद पर कार्यरत हैं, को वर्ष 2017 में चिरमिरी से सरगुजा जिले के लखनपुर नगर पंचायत में पदस्थ किया गया था। इसके बाद 21 फरवरी 2022 को उनका तबादला लखनपुर से कसडोल (जिला बलौदाबाजार-भाटापारा) कर दिया गया। इस नए ट्रांसफर आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दोनों पक्षों की दलीलेंयाचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि बार-बार ट्रांसफर किया जाना नियमों के खिलाफ है और इससे उन्हें नुकसान हो रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि यह आदेश प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि 2017 में जब पहला तबादला हुआ था, तब कर्मचारी ने कोई आपत्ति नहीं की थी। ऐसे में अब उसी आधार पर नए ट्रांसफर को चुनौती देना उचित नहीं है। अदालत की टिप्पणीन्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने कहा कि याचिकाकर्ता ने प्रारंभिक ट्रांसफर को स्वीकार किया और लंबे समय तक उस पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके अलावा, उन्होंने लगभग तीन साल तक अंतरिम राहत का लाभ भी लिया। ऐसे में बाद में उठाई गई आपत्ति को मान्य नहीं माना जा सकता।कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए 25 फरवरी 2022 को दिया गया स्टे ऑर्डर भी समाप्त कर दिया। टैग: Post navigation ब्रेकिंग न्यूज़ : रामकृष्ण केयर अस्पताल हादसा — 3 मजदूरों की मौत मामले में एट्रोसिटी एक्ट जोड़ा गया छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं हिंदी पेपर रद्द: पेपर लीक के बाद 10 अप्रैल को दोबारा परीक्षा, जांच तेज