राजनांदगांव नवजात मामले में डॉक्टर को हाईकोर्ट से बेल मिली। पुलिस जांच जारी है। केस में नवजात, नाबालिग और अस्पताल की भूमिका पर सवाल उठे।

राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में नाबालिग से जुड़े नवजात मामले में नया मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपी डॉक्टर विजय राज नागवंशी को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। इस फैसले के बाद एक ओर जहां पुलिस जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर इस केस को लेकर बहस तेज हो गई है।

मामले में आरोप है कि नाबालिग पीड़िता की डिलीवरी के बाद नवजात को दूसरे अस्पताल में भर्ती कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और बाद में एक दंपति को सौंप दिया गया। पुलिस ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए जांच शुरू की थी और अस्पताल स्टाफ की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसमें तीन लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।

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जांच के दौरान जन्म प्रमाण पत्र में गड़बड़ी और प्रक्रिया के उल्लंघन की बात सामने आई है। वहीं मुख्य आरोपी डॉक्टर लंबे समय तक फरार रहे, जिनकी गिरफ्तारी के लिए इनाम भी घोषित किया गया था। मामले में POCSO एक्ट समेत कई धाराओं में केस दर्ज है और अस्पताल प्रबंधन पर भी सवाल उठे हैं।

हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। सामाजिक संगठनों ने सख्त कार्रवाई की मांग की है, जबकि कानूनी विशेषज्ञ इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है और अन्य लोगों की संलिप्तता की भी पड़ताल की जा रही है।

वकील का बयान:

“मामला जैसा दिख रहा है, वास्तविकता उससे अलग है। दो नाबालिगों के संबंध से गर्भधारण हुआ था और सामाजिक दबाव के चलते परिजनों ने पीड़िता को छिपाकर रखा था। आपात स्थिति में कृष्णा हॉस्पिटल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर विजय राज नागवंशी ने मानवता के आधार पर डिलीवरी कराई। नवजात को बाद में दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया और बच्चे को परिजनों द्वारा सौंपा गया, जिसमें डॉक्टर की कोई भूमिका नहीं है। इसी आधार पर उन्हें हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिली है।”


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