सुशासन का शोर, लेकिन जमीनी हकीकत में लापरवाही का कहर

पंडरिया (कवर्धा): छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साई के सुशासन और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच पंडरिया विधानसभा क्षेत्र की जर्जर सड़कें आम जनता की जान ले रही हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (PMGSY) के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, लेकिन ठेकेदारों, अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की कथित मिलीभगत से घटिया सामग्री डालकर सड़कें बनाई जा रही हैं। नतीजा—बारिश में कीचड़, फिसलन और रोजाना हादसे।

शुक्रवार सुबह पेंड्री-कोलेगांव मार्ग पर ग्राम बसनी के पास एक और दर्दनाक हादसा हो गया। नवनिर्मित सड़क के किनारे ठेकेदार द्वारा डाली गई पीली मिट्टी बारिश में कीचड़ बन गई। इसी फिसलन पर बाइक अनियंत्रित हुई और सामने से आ रहे ट्रक के नीचे आ गई। मौके पर ही कृष्णा आदिले (सरंगपुर निवासी) और उनकी पत्नी कृति आदिले की मौत हो गई। उनका 4 वर्षीय बेटा लोकेश बाल-बाल बचा। ट्रक क्रमांक CG 09 B 0807 का चालक फरार है।

लापरवाही की इंतहा

ग्रामीणों का आरोप है कि कोलेगांव-हथमुड़ी, बोड़तरा-कुम्ही और कुम्ही-धोबघट्टी समेत कई PMGSY सड़कों पर मुरुम की जगह सस्ती पीली चिकनी मिट्टी डाली जा रही है। साइड शोल्डर उभरे हुए हैं, भराव अधूरा है। बरसात शुरू होते ही सड़क किनारे फिसलन का खतरा बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों ने पहले भी सोशल मीडिया, अखबारों और प्रशासन को शिकायतें दी थीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सवाल उठता है — बिल तो ठेकेदारों के पास हो जाते हैं, गुणवत्ता जांच कौन करता है? विभाग के अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचते? क्या ठेकेदार, अधिकारी और कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों के बीच सांठ-गांठ है, जिसकी वजह से शिकायतें दबाई जा रही हैं?

जनता का गुस्सा फूट पड़ा

हादसे के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने बिलासपुर-जबलपुर मुख्य मार्ग को तीन घंटे तक जाम कर दिया। उन्होंने ठेकेदार, PWD अधिकारियों और जिम्मेदार नेताओं के खिलाफ कार्रवाई तथा मुआवजे की मांग की। पुलिस और प्रशासन के समझाने के बाद जाम खुला।

ग्रामीणों का कहना है — “विकास के नाम पर लूट हो रही है। सड़कें बन रही हैं सिर्फ कागजों पर। जिम्मेदार लोग चुप्पी साधे बैठे हैं।” क्षेत्र में लंबे समय से यही हाल है। कई मुख्य मार्ग और गांवों की सड़कें उखड़ चुकी हैं। दुर्घटनाओं का सिलसिला थम नहीं रहा, लेकिन सुशासन तिहार में “पारदर्शिता और जवाबदेही” के नारे लगाए जा रहे हैं।

क्या सिस्टम जानबूझकर आंखें मूंद रहा है?

  • ट्रक का इंश्योरेंस और फिटनेस दोनों समाप्त थे, फिर भी PDS काम में लगा था।
  • निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बार-बार शिकायतें, लेकिन अधिकारी अनसुने।
  • प्रभावशाली लोगों का संरक्षण मिलने का आरोप।

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