मेडिकल उपकरण खरीद से लेकर फर्जी टेंडर, सिंडिकेट और करोड़ों की गड़बड़ी… अब बेल मिलने के बाद फिर चर्चा में पूरा मामला बिलासपुर/रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGMSC घोटाले में मोक्षित कॉर्पोरेशन के डायरेक्टर और कथित मास्टरमाइंड माने जा रहे शशांक चोपड़ा को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज PMLA केस में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें नियमित जमानत दे दी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने सुनवाई के दौरान माना कि आरोपी जनवरी 2025 से जेल में बंद है, जांच पूरी हो चुकी है और प्रॉसिक्यूशन शिकायत भी दाखिल हो चुकी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि ट्रायल लंबा चल सकता है, इसलिए आरोपी को अनिश्चितकाल तक जेल में रखना उचित नहीं होगा। लेकिन इस राहत के बाद एक बार फिर पूरा CGMSC घोटाला चर्चा में आ गया है। आखिर कैसे सरकारी मेडिकल उपकरण खरीद में करोड़ों रुपए की कथित गड़बड़ी हुई? कैसे टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया? और कैसे शासन को लगभग 550 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा? पढ़िए पूरी कहानी… क्या है पूरा CGMSC घोटाला? CGMSC यानी छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड राज्य के सरकारी अस्पतालों के लिए दवाइयां, मेडिकल उपकरण और जांच सामग्री खरीदने वाली संस्था है। जांच एजेंसियों के मुताबिक ‘हमर लैब योजना’ के तहत सरकारी अस्पतालों में मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीद में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं। आरोप है कि कुछ कंपनियों और अधिकारियों ने मिलकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया और बाजार से कई गुना ज्यादा कीमत पर सामान खरीदा गया। इसी कथित गड़बड़ी से सरकारी खजाने को करीब 550 करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचने का दावा किया गया है। 3 कंपनियों ने बनाया सिंडिकेट, ऐसे हुआ खेल ACB और EOW की जांच में सामने आया कि मोक्षित कॉर्पोरेशन, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने आपस में मिलकर सिंडिकेट बनाया था। जांच में दावा किया गया कि तीनों कंपनियों ने टेंडर में एक जैसे पैटर्न पर उत्पाद, पैक साइज और दरें भरीं। जिन उत्पादों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था, उन्हें भी समान तरीके से प्रस्तुत किया गया। सबसे कम दर मोक्षित कॉर्पोरेशन की रखी गई, जबकि बाकी कंपनियों की दरें उसके बाद दिखाई गईं। इससे टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई और एक तय प्लान के तहत ऑर्डर हासिल किए गए। फर्जी दस्तावेज और गलत जानकारी का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार कंपनियों ने अपनी योग्यता साबित करने के लिए फर्जी दस्तावेज लगाए। टेंडर में गलत जानकारियां दी गईं और पात्रता शर्तों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं, कई मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की कीमत वास्तविक MRP से कई गुना ज्यादा बताकर CGMSC को भेजी गई। आरोप है कि डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा ने भी इस कथित साजिश में अहम भूमिका निभाई। जांच में सामने आया कि ज्यादा कीमत दिखाने के कारण टेंडर ऊंची दरों पर मंजूर हुए और शासन को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। 27 दिनों में 750 करोड़ के ऑर्डर, ऐसे बढ़ा शक EOW की जांच रिपोर्ट के अनुसार CGMSC अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को महज 27 दिनों के भीतर करीब 750 करोड़ रुपए के ऑर्डर जारी कर दिए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि उस समय मेडिकल किट और उपकरणों की तत्काल आवश्यकता नहीं थी, बावजूद इसके तेजी से खरीद प्रक्रिया पूरी कराई गई। जांच एजेंसियों का आरोप है कि टेंडर की शर्तें भी फर्मों के मुताबिक बनाई गईं, जिससे दूसरी कंपनियां स्वतः बाहर हो गईं। शशांक चोपड़ा से पूछताछ के बाद बढ़ी जांच जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब ED ने शशांक चोपड़ा को हिरासत में लेकर पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आईं, जिसके बाद CGMSC के कुछ अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई। जांच एजेंसियों ने पूर्व में CGMSC से जुड़े अधिकारियों डॉ. अनिल परसाई, दीपक कुमार बांधे, बसंत कुमार कौशिक, कमलकांत पाटनवार और क्षिरोद रौतिया पर शशांक चोपड़ा को संरक्षण देने के आरोप लगाए थे। इन अधिकारियों पर पहले ही कार्रवाई की जा चुकी है। ACB ने पेश किया पूरक चालान अब इस मामले में ACB ने पूरक चालान पेश करते हुए रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स के डायरेक्टर अभिषेक कौशल, श्री शारदा इंडस्ट्रीज के प्रोप्राइटर राकेश जैन, लाइजनर प्रिंस जैन और डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा को आरोपी बनाया है। अब तक कुल 10 आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जा चुका है और जांच अभी भी जारी है। ननकीराम कंवर की शिकायत से खुला मामला इस पूरे घोटाले का मामला तब सामने आया जब पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दिसंबर 2024 में प्रधानमंत्री कार्यालय, केंद्रीय गृह मंत्रालय, CBI और ED मुख्यालय में शिकायत की। इसके बाद केंद्र सरकार के निर्देश पर EOW ने जांच शुरू की और पांच लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की गई। धीरे-धीरे जांच आगे बढ़ी और मामला करोड़ों रुपए के कथित भ्रष्टाचार तक पहुंच गया। अब आगे क्या? फिलहाल शशांक चोपड़ा को हाईकोर्ट से नियमित जमानत मिल चुकी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी उन्हें ACB/EOW के मूल केस में राहत दे चुका है। हालांकि जांच एजेंसियां अब भी मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस चर्चित घोटाले में और नाम सामने आ सकते हैं। अब सबकी नजर ट्रायल कोर्ट की सुनवाई और अंतिम फैसले पर टिकी हुई है। #BREAKINGNEWS #CGMSC #ShashankChopra #EDCase #ACB #EOW #RaipurBreaking #ChhattisgarhNews #CGMSCScam #BilaspurNews Post navigation रायपुर ज्वेलरी चोरी में बड़ा ट्विस्ट : रायपुर में हाईप्रोफाइल चोरी के बाद मौत, नाबालिग साथी से मिले 10 लाख के जेवर धूप में हेलमेट पहन बुलेट दौड़ाते पहुंचे विधायक सुशांत शुक्ला… कलेक्ट्रेट में देखते रह गए लोग