बिलासपुर। कुदुदंड की तंग गलियों से निकलकर एक लड़का अब भारत की नीली जर्सी पहनने जा रहा है। नाम है अवि मानिकपुरी। हॉकी इंडिया ने जब पुरुष अंडर-18 एशिया कप के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया, तो छत्तीसगढ़ के खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई।

करीब पांच दशक बाद ऐसा मौका आया है, जब बिलासपुर का कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय हॉकी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। इससे पहले यह गौरव Leslie Claudius ने दिलाया था, जिन्होंने ओलंपिक में भारत को कई ऐतिहासिक जीत दिलाई थीं। अब अवि को उसी विरासत का नया चेहरा माना जा रहा है।

अभावों से निकला खिलाड़ी, जिसने हार मानना नहीं सीखा

अवि की कहानी सिर्फ चयन की खबर नहीं, बल्कि संघर्ष की मिसाल है। साधारण परिवार से आने वाले इस खिलाड़ी ने बिना बड़े संसाधनों के हॉकी खेलना शुरू किया। कई बार सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन सपना बड़ा था — भारत के लिए खेलना।

स्थानीय टूर्नामेंट से लेकर जूनियर नेशनल तक अवि हर मैच में अलग नजर आए। उनकी रफ्तार, आक्रामक डिफेंस और मैदान को पढ़ने की क्षमता ने कोचों का ध्यान खींचा। धीरे-धीरे वही खिलाड़ी अब टीम इंडिया की डिफेंस लाइन का हिस्सा बन गया।

ऑस्ट्रेलिया सीरीज ने बदल दी किस्मत

भोपाल में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली गई 4 मैचों की एक्सपोजर सीरीज अवि के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। 15 से 20 मई तक चली इस सीरीज में उन्होंने डिफेंडर के रूप में ऐसा प्रदर्शन किया कि चयनकर्ताओं को प्रभावित कर दिया।

सीरीज में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली। दो मुकाबले ड्रॉ रहे, जबकि दोनों टीमों ने एक-एक मैच जीता। इसी दौरान पूर्व भारतीय कप्तान Sardar Singh की निगरानी में खिलाड़ियों का चयन किया गया और अवि को टीम इंडिया का टिकट मिल गया।

बिलासपुर से एमपी अकादमी… फिर टीम इंडिया

अवि ने बहतराई स्थित एक्सीलेंस सेंटर में कोच अजीत लकड़ा और राकेश टोप्पो से ट्रेनिंग ली। यहीं से उनके खेल को नई दिशा मिली। बाद में उनका चयन मध्यप्रदेश हॉकी अकादमी में हुआ, जहां कोच समीर दाद ने उनकी प्रतिभा को और निखारा।

दिलचस्प बात यह है कि इसी अकादमी से 6 खिलाड़ियों का भारतीय टीम में चयन हुआ है। इनमें अवि मानिकपुरी के अलावा आयुष रजक, अंश बहुतरा, करण गौतम, सिद्धार्थ बेन और गाजी खान शामिल हैं।

जापान, कोरिया और कजाकिस्तान से भिड़ेगा भारत

अंडर-18 एशिया कप का आयोजन 29 मई से 6 जून तक जापान के काकामिगाहारा शहर में होगा। भारत का पहला मुकाबला 29 मई को कजाकिस्तान से होगा। इसके बाद भारतीय टीम जापान, कोरिया और चीनी ताइपे जैसी मजबूत टीमों से भिड़ेगी।

5 जून को नॉकआउट और सेमीफाइनल मुकाबले खेले जाएंगे, जबकि 6 जून को दोपहर 3:30 बजे फाइनल होगा। भारतीय टीम इस बार खिताब जीतने के इरादे से मैदान में उतरेगी।

खिलाड़ी मेडल ला रहे, सिस्टम अब भी धीमा

एक तरफ छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी देश और राज्य का नाम रोशन कर रहे हैं, दूसरी तरफ खेल कोटे से नौकरी देने की प्रक्रिया अब भी सुस्त पड़ी है।

सरकारी नौकरी के लिए उत्कृष्ट खिलाड़ियों की सूची जरूरी होती है, लेकिन यह सूची आखिरी बार 2017 में जारी हुई थी। 2009 से 2017 के बीच 182 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किया गया था, जिनमें से करीब 88 खिलाड़ियों को नौकरी मिली।

नई सूची जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई, चयन समिति भी बनी, लेकिन फाइल अब भी दफ्तरों में अटकी हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब खिलाड़ी देश के लिए खेल सकते हैं, तो क्या सिस्टम उनके भविष्य के लिए तेजी नहीं दिखा सकता?

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