15,600 रुपये स्टाइपेंड के साथ मिलेगा एक साल का प्रशिक्षण

रायपुर। विदेश से MBBS (FMG) करने वाले छात्रों की अनिवार्य इंटर्नशिप के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग ने दूसरा राउंड शुरू कर दिया है। छात्र 9 जून तक मेडिकल कॉलेजों की च्वाइस फिलिंग कर सकेंगे।

पहले राउंड में 142 छात्रों को सीट आवंटित की गई थी, जिनमें से 140 ने प्रवेश ले लिया। इसके बावजूद प्रदेश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध 1089 इंटर्नशिप सीटों में से 949 सीटें अभी भी खाली हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि दूसरे राउंड में भी सभी सीटें भरना मुश्किल होगा। इसकी मुख्य वजह FMGE (फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम) में कम सफलता दर है। हर साल बड़ी संख्या में छात्र विदेश से MBBS की पढ़ाई पूरी करते हैं, लेकिन FMGE पास करने के बाद ही उन्हें भारत में इंटर्नशिप की पात्रता मिलती है। इस परीक्षा का सफलता प्रतिशत सामान्यतः 12 से 22 प्रतिशत के बीच रहता है।

FMGE पास करने वाले छात्रों को भारत में एक वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। इंटर्नशिप पूरी होने के बाद उन्हें छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में स्थायी पंजीयन मिल सकता है, जिसके बाद वे सरकारी और निजी अस्पतालों में सेवाएं देने के साथ स्वतंत्र चिकित्सा अभ्यास भी कर सकते हैं।

NMC की गाइडलाइन के अनुसार विदेश में इंटर्नशिप कर चुके छात्रों को भी भारत में FMGE पास करने के बाद एक साल की इंटर्नशिप करना अनिवार्य है। इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को प्रति माह 15,600 रुपये स्टाइपेंड दिया जाता है।

इधर, कुछ निजी मेडिकल कॉलेजों पर FMG छात्रों से अतिरिक्त शुल्क वसूलने के आरोप लगे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि यदि कॉलेज छात्रों से राशि लेकर उसी से स्टाइपेंड का भुगतान कर रहे हैं तो यह नियमों के विरुद्ध है। हालांकि अधिकांश छात्र इंटर्नशिप प्रभावित होने के डर से शिकायत दर्ज नहीं करा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में वर्तमान में MBBS की करीब 2330 सीटें हैं। चिकित्सा education विभाग के अनुसार इस वर्ष 5 नए सरकारी और 1 निजी मेडिकल कॉलेज शुरू होने की संभावना है, जिससे MBBS सीटों की संख्या में और बढ़ोतरी हो सकती है।

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