रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब की बिक्री व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है। राज्य सरकार द्वारा प्लास्टिक (PET) बोतलों में शराब बिक्री लागू करने के फैसले के बाद सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो गई है। आधी-अधूरी तैयारी और बार-बार बदले गए आदेशों के कारण प्रदेश की शराब दुकानों में देसी और किफायती अंग्रेजी शराब की भारी कमी देखने को मिल रही है।

सप्लाई व्यवस्था पर पड़ा सीधा असर

प्रदेश की करीब 800 शराब दुकानों में मांग के मुकाबले सप्लाई बेहद कम पहुंच रही है। कई दुकानों में लोकप्रिय ब्रांड्स का स्टॉक पूरी तरह खत्म हो चुका है। स्थिति यह है कि रोजाना की बिक्री प्रभावित हो रही है और ग्राहक खाली हाथ लौट रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, डिस्टिलर्स और बॉटल सप्लायर लॉबी के बीच विवाद और तकनीकी तैयारी की कमी के चलते उत्पादन और बॉटलिंग प्रक्रिया कई दिनों तक बाधित रही, जिसका सीधा असर बाजार सप्लाई पर पड़ा।

दो बार बदला गया आदेश, बढ़ी उलझन

सरकार ने 1 अप्रैल से PET प्लास्टिक बोतलों में बॉटलिंग का आदेश लागू किया था। लेकिन अचानक लागू हुए इस फैसले से उद्योग जगत में हड़कंप मच गया।

कांच की बोतल सप्लाई करने वाले कई कारोबारी कोर्ट पहुंच गए, वहीं प्लास्टिक बोतलों की पर्याप्त व्यवस्था भी नहीं हो सकी। स्थिति बिगड़ने पर विभाग को 31 मई तक कांच की बोतलों में बॉटलिंग की अस्थायी अनुमति देनी पड़ी।

इस बीच लगभग 10 दिनों तक कई डिस्टिलरियों में उत्पादन और बॉटलिंग पूरी तरह ठप रही, जिससे सप्लाई चैन टूट गई।

राजस्व पर भी बड़ा असर

आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में प्रतिदिन लगभग 70 करोड़ रुपये की शराब बिक्री होती है। सप्लाई बाधित होने से राज्य को हर दिन 40 से 50 करोड़ रुपये तक राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।

सरकार का दावा और आगे की चेतावनी

सरकार ने प्लास्टिक बोतलों में शराब बिक्री का फैसला मिलावट रोकने के उद्देश्य से लिया था, लेकिन क्रियान्वयन में दिक्कतों के कारण बार-बार बदलाव करना पड़ा।

आबकारी विभाग का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

आबकारी आयुक्त पदुम एल्मा ने बताया कि डिस्टिलर्स के साथ बैठकें जारी हैं। 15 मई से प्लास्टिक बोतलों में नियमित सप्लाई शुरू करने की तैयारी है। उन्होंने चेतावनी दी है कि 31 मई के बाद जो भी डिस्टिलर्स सप्लाई में लापरवाही करेगा, उसका लाइसेंस सस्पेंड किया जाएगा।

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