रायपुर में शराब दुकानों के संचालन पर नया विवाद: इनोवसोर्स के कार्यालय, भर्ती प्रक्रिया और कथित सिंडिकेट पर उठे गंभीर सवाल रायपुर, दुर्ग और बेमेतरा की शराब दुकानों का संचालन करने वाली इनोवसोर्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर भर्ती में अवैध वसूली, कार्यालय संचालन और कथित सिंडिकेट चलाने के गंभीर आरोप लगे हैं। जानिए पूरा मामला। रायपुर | JOHARPOST.IN छत्तीसगढ़ में शराब दुकानों के संचालन को लेकर एक बार फिर नया विवाद सामने आया है। रायपुर, दुर्ग और बेमेतरा जिलों की शराब दुकानों के संचालन का ठेका संभाल रही इनोवसोर्स सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (Innovsource Services Pvt. Ltd.) की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोपों में कार्यालय संचालन की वैधता, भर्ती प्रक्रिया में कथित अवैध वसूली, अनधिकृत व्यक्तियों के हस्तक्षेप और कर्मचारियों पर अधिक कीमत पर शराब बेचने का दबाव शामिल है। हालांकि, इन आरोपों की अब तक किसी सक्षम न्यायिक अथवा सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी समाचार लिखे जाने तक सामने नहीं आई थी। कार्यालय के संचालन पर उठे सवाल मिली जानकारी के अनुसार रायपुर के वीआईपी रोड स्थित मौलश्री विहार (राम मंदिर के पीछे) में संचालित कार्यालय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि जिस भवन से गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, वहां कंपनी के संचालन से जुड़े आवश्यक दस्तावेजों और स्थानीय सत्यापन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। सूत्रों का यह भी दावा है कि उक्त परिसर किसी अन्य निजी कंपनी के नाम पर किराए पर लिया गया है और वहां से इनोवसोर्स की गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन दावों का स्वतंत्र सत्यापन फिलहाल नहीं हो सका है। अनधिकृत हस्तक्षेप के आरोप मामले में यह आरोप भी लगाए गए हैं कि कार्यालय में ऐसे कुछ व्यक्तियों की सक्रिय भूमिका है जो कंपनी के अधिकृत पदों पर नहीं हैं, लेकिन भर्ती और संचालन से जुड़े निर्णयों में प्रभाव रखते हैं। शिकायतकर्ताओं ने संस्कार सिंघानिया और अंकुर पालीवाल का नाम लेते हुए आरोप लगाया है कि दोनों बिना किसी अधिकृत पद के कार्यालय की गतिविधियों में हस्तक्षेप कर रहे हैं। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। भर्ती के नाम पर अवैध वसूली का आरोप शिकायत में दावा किया गया है कि शराब दुकानों में कर्मचारियों और सुपरवाइजरों की नियुक्ति के नाम पर उम्मीदवारों से कथित रूप से बड़ी रकम वसूली जा रही है। आरोप है कि कुछ मामलों में प्रति कर्मचारी लगभग एक लाख रुपये तक की मांग की गई। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह न केवल भर्ती प्रक्रिया बल्कि सरकारी ठेका प्रणाली की पारदर्शिता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर सकता है। फर्जी चरित्र प्रमाण पत्र का भी आरोप मामले में जिला समन्वयक स्तर के एक कर्मचारी से जुड़ा एक और गंभीर आरोप सामने आया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि परितोष कश्यप नामक व्यक्ति ने कथित रूप से फर्जी पुलिस चरित्र प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी प्राप्त की। शिकायत के अनुसार संबंधित थाना प्रभारी ने लिखित रूप से यह जानकारी दी थी कि ऐसा कोई प्रमाण पत्र उनके थाने से जारी नहीं हुआ था। इसके बाद शिकायत दर्ज कर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि अब तक किसी प्रकार की एफआईआर या अन्य कार्रवाई नहीं हुई। इसी मामले को लेकर जिला आबकारी अधिकारी को भी शिकायत दिए जाने का दावा किया गया है। हालांकि विभाग की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। कर्मचारियों पर ओवररेटिंग का दबाव? शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कुछ शराब दुकानों में कर्मचारियों पर एमआरपी से अधिक कीमत पर शराब बेचने का दबाव बनाया जा रहा है। यह भी दावा किया गया है कि प्रारंभिक स्तर पर कुछ सुपरवाइजरों ने अवैध वसूली और दबाव से जुड़े आरोप अधिकारियों के सामने रखे हैं। हालांकि इस संबंध में किसी जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। अधिकारियों के हटने और इस्तीफे पर भी सवाल सूत्रों के अनुसार हाल के दिनों में कंपनी के जिला समन्वयक को हटाए जाने तथा राज्य प्रमुख के अचानक इस्तीफा देने को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह बदलाव संगठनात्मक पुनर्गठन नहीं बल्कि कथित नए नेटवर्क के गठन का हिस्सा हो सकता है। हालांकि कंपनी ने इन बदलावों के कारणों पर कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है। पहले भी शराब दुकानों में कार्रवाई हो चुकी प्रदेश में हाल के महीनों में शराब दुकानों में ओवररेटिंग और अन्य अनियमितताओं को लेकर कई कार्रवाई हो चुकी हैं। आबकारी विभाग, ईडी, ईओडब्ल्यू और एसीबी विभिन्न मामलों की जांच कर रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में इन नए आरोपों ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। निष्पक्ष जांच की मांग शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि— इनोवसोर्स के कार्यालय से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच कराई जाए। भर्ती प्रक्रिया में कथित अवैध वसूली की स्वतंत्र जांच हो। अनधिकृत व्यक्तियों की भूमिका स्पष्ट की जाए। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। Post navigation आधी रात को जागता है पूरा गांव, फिर घरों में कैद हो जाते हैं लोग… दुर्ग के कचांदुर में आज भी जीवित है ‘सवनाही’ की सदियों पुरानी परंपरा सेक्स सीडी केस में भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, CBI कोर्ट की कार्रवाई पर लगी रोक