बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक स्थित लाखासार गौधाम में मवेशियों की खराब हालत को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। यह मामला जनहित याचिका के रूप में दर्ज हुआ है, जिसके बाद अदालत ने पशुपालन विभाग के सचिव को शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

यह वही गौधाम है जिसका शुभारंभ 14 मार्च को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया था। उस समय इसे 25 एकड़ में विकसित गौसंरक्षण केंद्र के रूप में पेश किया गया था, जिसमें प्रशिक्षण भवन और पशु सुविधाओं के विस्तार की घोषणाएं भी की गई थीं।


205 गायें एक छोटे शेड में ठूंसीं

दैनिक भास्कर की 3 मई की रिपोर्ट के अनुसार गौधाम में हालात बेहद गंभीर हैं। 10×26 फीट के एक छोटे शेड में करीब 205 गायों को रखा गया है, जहां उनके बैठने और आराम करने तक की पर्याप्त जगह नहीं है।

पशु चिकित्सकों के अनुसार एक गाय के लिए 30–40 वर्गफुट ढका हुआ स्थान जरूरी होता है, लेकिन यहां क्षमता से कई गुना अधिक मवेशी रखे गए हैं, जिससे बीमारियों और दम घुटने का खतरा बढ़ गया है।


चारा-पानी की भारी कमी

गौधाम में केवल जगह ही नहीं, बल्कि चारा और पानी की भी गंभीर समस्या है। बताया गया कि 200 से अधिक मवेशियों के लिए दिनभर में केवल 25–30 बोझा पैरा ही उपलब्ध हो पाता है, जो बेहद कम है।

इसके अलावा पूरे 25 एकड़ परिसर की देखरेख सिर्फ एक चौकीदार के जिम्मे है, जिसे 12 हजार रुपये मासिक वेतन पर 24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है।


अन्य गंभीर अनियमितताएं

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नवजात बछड़ों को उनकी मां से अलग रखा जा रहा है, जिसे पशु कल्याण के मानकों के खिलाफ माना जा रहा है। साथ ही गौधाम के मुख्य उद्देश्य—सड़कों से मवेशियों को हटाना—भी पूरी तरह सफल नहीं हो सका है, क्योंकि आसपास की सड़कों पर अब भी मवेशी घूमते नजर आते हैं।


हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने पशुपालन विभाग से विस्तृत शपथपत्र के साथ जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 14 मई को तय की गई है।

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