47 टन खरीदी… 107 टन बिक्री: दस्तावेजों ने खोली गैस घोटाले की पोल

विजय सिन्हा की रिपोर्ट/ महासमुंद। जिले में जब्त एलपीजी गैस से जुड़े करोड़ों रुपए के घोटाले में पुलिस जांच के दौरान कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। थाना सिंघोड़ा में दर्ज अपराध क्रमांक 96/25 में जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, व्यापारी मनीष चौधरी और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर को गिरफ्तार किया गया है। वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार बताए जा रहे हैं।

जांच एजेंसियों और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा पुलिस ने 6 एलपीजी कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया था। कैप्सूल्स में करीब 90 से 105 मीट्रिक टन LPG गैस भरी होने का अनुमान था। बाद में सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए इन कैप्सूल्स को अभनपुर के ग्राम उरला स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स प्लांट भेजा गया।

23 मार्च की बैठक से शुरू हुई साजिश की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक 23 मार्च को एक ढाबे में खाद्य अधिकारी अजय यादव और गौरव गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर के बीच बैठक हुई थी। जांच में यह बात सामने आई है कि इसी दौरान जब्त गैस को निकालने और खपाने को लेकर चर्चा हुई थी।

इसके बाद व्यापारी मनीष चौधरी की एंट्री हुई, जिसने कथित तौर पर गैस सप्लाई नेटवर्क और एजेंसियों से संपर्क साधने का काम किया।

26 मार्च को सिंघोड़ा पहुंचे आरोपी

जांच के अनुसार 26 मार्च को अजय यादव और पंकज चंद्राकर सिंघोड़ा पहुंचे थे। यहां गैस कैप्सूल्स का निरीक्षण किया गया और उनमें मौजूद गैस की मात्रा का आकलन किया गया। पुलिस को शक है कि इसके बाद गैस निकालने की पूरी रणनीति तैयार की गई।

बिना वजन कराए अभनपुर भेजे गए कैप्सूल

30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की निगरानी में सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स भेजा गया। जांच में सामने आया कि सिंघोड़ा से अभनपुर तक करीब 200 किलोमीटर के रास्ते में कई धर्मकांटे होने के बावजूद ट्रकों का वजन नहीं कराया गया।

सूत्रों के अनुसार हैंडओवर के समय भी वास्तविक गैस मात्रा का सत्यापन नहीं हुआ। बाद में 5 ट्रकों का वजन 6 अप्रैल और एक ट्रक का वजन 8 अप्रैल को कराया गया।

बुलेट टैंक और निजी टैंकरों में भरी गई गैस

जांच एजेंसियों के मुताबिक इन दिनों के दौरान गैस को कैप्सूल्स से निकालकर प्लांट के बुलेट टैंकों में भरा गया। टैंक भरने के बाद निजी टैंकरों और अलग-अलग एजेंसियों को LPG सप्लाई किए जाने की बात भी सामने आई है।

बताया जा रहा है कि कई जगह बिना पक्के बिल के कच्चे चालान पर 4 से 6 टन गैस सप्लाई की गई।

दस्तावेजों में बड़ा अंतर

पुलिस जांच में कंपनी के खरीद और बिक्री रिकॉर्ड में बड़ा अंतर सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में करीब 47 टन LPG खरीदी गई, जबकि बिक्री 107 टन दिखाई गई।

यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जिसका खरीद रिकॉर्ड नहीं मिला। पुलिस इस अंतर को जब्त कैप्सूल्स से निकाली गई गैस से जोड़कर जांच कर रही है।

आरंग के ढाबे में हुई दूसरी बैठक

सूत्रों के मुताबिक 20 अप्रैल को आरंग के एक ढाबे में फिर बैठक हुई थी। जांच एजेंसियों को शक है कि इस बैठक में मामले का दोष पुलिस पर डालने और जांच से बचने को लेकर चर्चा हुई थी। पुलिस अब इस एंगल पर भी जांच कर रही है।

तकनीकी जांच में लीकेज नहीं मिला

राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी विशेषज्ञों की जांच में कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित पाए गए। रिपोर्ट में किसी बड़े लीकेज की संभावना से इनकार किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक इतनी बड़ी मात्रा में गैस सामान्य रूप से खत्म होना संभव नहीं है।

कंपनी मालिक फरार, कई सामान जब्त

पुलिस ने मामले में पहले कंपनी कर्मचारी निखिल वैष्णव को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, DVR, कंप्यूटर और कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

फिलहाल पुलिस फरार संचालक संतोष ठाकुर, सार्थक ठाकुर और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश कर रही है।


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