कवर्धा। मानसून की पहली ही बारिश ने एक बार फिर पंडरिया विकासखंड के सेंदुरखार–कुकदूर मार्ग पर स्थित ढोलढोली रपटा की भयावह तस्वीर सामने ला दी है। आगर नदी उफान पर है और रपटे के ऊपर से तेज़ बहाव के साथ पानी गुजर रहा है। इसके बावजूद ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर इस रपटे को पार करने के लिए मजबूर हैं।

सोशल मीडिया पर सामने आए ताज़ा वीडियो में एक चारपहिया वाहन रपटे के बिल्कुल किनारे तक पहुंच जाता है। पुलिया पर किसी प्रकार की सुरक्षा रेलिंग (बॉर्डर) नहीं होने के कारण वाहन पलटने की स्थिति में दिखाई देता है। आसपास मौजूद लोगों की सांसें थम जाती हैं और किसी तरह सभी अपनी जान बचाकर नदी के दूसरे किनारे पहुंचते हैं। यह दृश्य किसी भी व्यक्ति को झकझोर देने वाला है।

हजारों ग्रामीणों की जीवनरेखा बना यह रपटा

यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि क्षेत्र के कई वनांचल और आदिवासी गांवों की जीवनरेखा है। सेंदुरखार, कुकदूर और आसपास के अनेक गांवों के लोग रोज़मर्रा के काम, शिक्षा, इलाज और बाजार आने-जाने के लिए इसी रास्ते का उपयोग करते हैं। बारिश शुरू होते ही यही रास्ता सबसे बड़ा खतरा बन जाता है।

हर साल उठती है मांग, फिर भी नहीं हुआ स्थायी समाधान

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस रपटे की समस्या कोई नई नहीं है। पिछले कई वर्षों से बारिश के मौसम में यही हालात बनते हैं। कई बार वीडियो और तस्वीरें सामने आईं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से स्थायी पुल बनाने की मांग भी उठी, लेकिन आज तक स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि हर साल बरसात में उनकी जान जोखिम में पड़ती है, लेकिन जिम्मेदार विभाग केवल आश्वासन देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल देता है।

क्षेत्र विधायक भावना बोहरा के विधानसभा क्षेत्र का मामला

यह इलाका पंडरिया विधानसभा के अंतर्गत आता है, जिसका प्रतिनिधित्व विधायक भावना बोहरा करती हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों का सवाल है कि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा? आखिर कब तक वनांचल के लोगों को अपनी जान हथेली पर रखकर इस रपटे को पार करना पड़ेगा?

उठ रहे हैं कई बड़े सवाल

  • क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
  • आखिर वर्षों से लंबित स्थायी पुल का निर्माण क्यों नहीं हो पाया?
  • बिना सुरक्षा रेलिंग वाले इस रपटे पर लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?
  • यदि कोई बड़ा हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
  • क्या वनांचल के लोगों की जान की कीमत प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के लिए इतनी कम है?

फिलहाल बारिश की शुरुआत में ही सामने आई यह तस्वीर प्रशासनिक तैयारियों और जनसुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।


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