कबीरधाम। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से महिला बाल विकास विभाग पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया में रिश्वतखोरी, नियमों में हेरफेर और गरीब आदिवासी महिला के साथ अन्याय का खेल खेला गया। अब पीड़िता न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। मामला बोडला विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मुडघुसरी मैदान का है, जहां वर्ष 2025 में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका पद के लिए भर्ती प्रक्रिया निकाली गई थी। जानकारी के मुताबिक कुल 16 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद गीता मरावी का चयन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पद के लिए किया गया, जबकि सहायिका पद पर दशरी साहू की नियुक्ति हुई थी। लेकिन चयन के बाद अचानक पूरा मामला पलट गया। पीड़िता गीता मरावी का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया के दौरान उनसे 1 लाख रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। कथित तौर पर 50 हजार रुपये नियुक्ति के समय और बाकी 50 हजार रुपये कुछ दिन बाद देने की बात तय हुई थी। गीता मरावी का कहना है कि आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह पूरी रकम नहीं दे सकीं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों का रवैया बदल गया और उनकी नियुक्ति रद्द करने की तैयारी शुरू हो गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस विज्ञापन के आधार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी हुई, उसमें कहीं भी “मुडघुसरी प्लाट” से चयन का कोई नियम दर्ज नहीं था। बावजूद इसके बाद में अचानक नया नियम जोड़ते हुए यह कहा गया कि चयन “मुडघुसरी प्लाट” से होना चाहिए। आरोप है कि इसी आधार पर गीता मरावी की नियुक्ति निरस्त कर दी गई। पीड़िता का आरोप है कि परियोजना अधिकारी नमन देशमुख ने आनन-फानन में दोबारा आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी। इससे पूरे भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर चयन प्रक्रिया पूरी होने और नियुक्ति होने के बाद नियम कैसे बदल दिए गए? यदि पहले से ऐसा कोई प्रावधान नहीं था तो बाद में इसे क्यों जोड़ा गया? गीता मरावी का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत एसडीएम कार्यालय और कलेक्टर कार्यालय में भी की, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जांच सिर्फ फाइलों में घूमती रही। न किसी अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न ही उन्हें न्याय मिल पाया। पीड़िता ने दावा किया है कि उनके पास कथित पैसों के लेन-देन और बातचीत से जुड़ी ऑडियो कॉल रिकॉर्डिंग मौजूद है, जो भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार की परतें खोल सकती है। यदि इन रिकॉर्डिंग की निष्पक्ष जांच होती है तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। अब न्याय की उम्मीद टूटने के बाद आदिवासी महिला अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। साथ ही वह अपनी शिकायत कवर्धा विधायक एवं उपमुख्यमंत्री Vijay Sharma तक पहुंचाने वाली है। यह मामला सिर्फ एक भर्ती विवाद नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर बड़ा सवाल है जो गरीब, आदिवासी और कमजोर वर्ग की महिलाओं को न्याय दिलाने के बड़े-बड़े दावे करती है। “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” जैसे नारों के बीच यदि एक चयनित आदिवासी महिला को रिश्वत नहीं देने पर नौकरी से वंचित किया जाता है, तो यह पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। सबसे अहम बात यह है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं। ऐसे में अब पूरे प्रदेश की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या एक गरीब आदिवासी महिला को न्याय मिलेगा, या फिर भ्रष्टाचार और दबाव का यह कथित खेल यूं ही चलता रहेगा। Post navigation समधी बना कातिल! मामूली विवाद में बुजुर्ग की बेरहमी से हत्या, आरोपी गिरफ्तार VIDEO VIRAL : डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के साथ धक्का-मुक्की, जैतपुरी गांव में तनाव