दुर्ग। जिला अस्पताल में सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित युवती दीपिका गाड़ा की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अस्पताल के 9 स्वास्थ्य कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 48 घंटे के भीतर जवाब मांगा गया है। प्रशासन का कहना है कि जांच में इलाज और ब्लड उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में कई स्तरों पर लापरवाही सामने आई है।

जानकारी के अनुसार भिलाई के मरोदा क्षेत्र की रहने वाली दीपिका गाड़ा सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित थी। तबीयत बिगड़ने पर उसे दुर्ग जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के दौरान उसका हीमोग्लोबिन स्तर करीब 5 ग्राम पाया गया, जबकि सामान्य तौर पर महिलाओं में हीमोग्लोबिन 12 से 15 ग्राम प्रति डेसीलीटर माना जाता है। डॉक्टरों ने तत्काल ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत बताई थी।

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल की ओर से तीन यूनिट ब्लड की व्यवस्था करने के लिए कहा गया, लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने और तत्काल डोनर नहीं मिलने के कारण वे खून की व्यवस्था नहीं कर सके। परिवार ने अस्पताल और ब्लड बैंक से कम से कम एक यूनिट खून उपलब्ध कराने की मांग की थी, लेकिन समय पर ब्लड नहीं मिलने से दीपिका की हालत बिगड़ती चली गई और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

मामले के तूल पकड़ने के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने दो सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। करीब सात दिनों तक चली जांच में भर्ती प्रक्रिया, ब्लड ट्रांसफ्यूजन नियमों और उपचार से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा की गई। रिपोर्ट में 9 कर्मचारियों की प्रत्यक्ष और परोक्ष जिम्मेदारी तय की गई है, जिसके बाद सभी को नोटिस जारी किया गया है।

सिविल सर्जन डॉ. आशीषन मिंज ने भी स्वीकार किया था कि मरीज का हीमोग्लोबिन काफी कम था और आपात स्थिति को देखते हुए एक या दो यूनिट ब्लड उपलब्ध कराया जा सकता था। अब सभी कर्मचारियों के जवाब मिलने के बाद प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।

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