दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेंज साइबर थाना पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा करते हुए अंतरराज्यीय ठग गिरोह के तीन आरोपियों को दिल्ली से गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर बीमा पॉलिसी रिफंड दिलाने का झांसा देकर लोगों से 1 करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की ऑनलाइन ठगी करने का आरोप है। पुलिस की इस कार्रवाई को साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। 1.60 करोड़ की साइबर ठगी का पर्दाफाश, दुर्ग पुलिस ने दिल्ली से दबोचे 3 आरोपी… पढ़िए पूरा मामलाHashtags: #DurgPolice #CyberFraud #CyberCrime #OnlineScam #InsuranceFraud #Chhattisgarh #Delhi #CyberPolice #JoharPost #BreakingNews pic.twitter.com/XGawERepFq— JOHARPOST.IN (@johar_post) July 3, 2026 बीमा रिफंड के नाम पर लोगों को बनाया शिकार पुलिस के अनुसार, अपराध क्रमांक 03/2026 के तहत दर्ज इस मामले में आरोपियों ने खुद को बीमा से जुड़े अधिकारी बताकर लोगों को बीमा पॉलिसी रिफंड का लालच दिया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया गया। यह मामला भिलाई नगर के रुआबांधा निवासी कपिल सिंह वर्मा (50 वर्ष) की शिकायत पर दर्ज किया गया। शिकायत के अनुसार, यह ठगी 17 अक्टूबर 2023 से 23 फरवरी 2026 के बीच की गई। दिल्ली पहुंची दुर्ग पुलिस, ऐसे खुला पूरा नेटवर्क जांच के दौरान साइबर थाना की टीम तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय सूचना के आधार पर दिल्ली पहुंची। सबसे पहले एक बैंक खाते के धारक को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में मिले इनपुट के बाद मुख्य आरोपी तक पुलिस पहुंच गई। मुख्य आरोपी ईशांत माहे ने पूछताछ में बताया कि पैसों के लालच में कई बैंक खाते खुलवाए गए थे। बाद में इन खातों को एक नाइजीरियन व्यक्ति “जानसन” के हवाले कर दिया गया, जो इन खातों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर साइबर ठगी के लिए करता था। ये तीन आरोपी गिरफ्तार मनमीत सिंह (42 वर्ष), तिलक विहार, तिलक नगर, नई दिल्ली। ईशांत माहे (37 वर्ष), गुरुनानक एन्क्लेव, चंदर विहार, निलोठी, दिल्ली। अमंदीप सिंह (33 वर्ष), मूल निवासी श्रीगंगानगर (राजस्थान), वर्तमान निवासी चंदर विहार, दिल्ली। जांच में क्या-क्या हुआ जब्त पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से— 06 बैंक पासबुक 04 चेकबुक 03 मोबाइल फोन सिम कार्ड बरामद किए हैं। इन इलेक्ट्रॉनिक और बैंकिंग दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। कांस्टेबल के खातों में करोड़ों का लेन-देन जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। पुलिस को जानकारी मिली कि एक कांस्टेबल के बैंक खातों में भी करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इन खातों का उपयोग साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर करने यानी मनी लॉन्ड्रिंग/मनी वॉशिंग के लिए किया गया। इस पूरे पहलू की गहन जांच जारी है। दिल्ली कोर्ट से ट्रांजिट रिमांड पर लाए गए आरोपी तीनों आरोपियों को 1 जुलाई 2026 को दिल्ली की अदालत से ट्रांजिट रिमांड पर लेकर दुर्ग लाया गया। फिलहाल उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस का मानना है कि पूछताछ में और भी कई राज्यों में फैले साइबर नेटवर्क का खुलासा हो सकता है तथा कई अन्य गिरफ्तारियां भी संभव हैं। इन अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका इस पूरे ऑपरेशन का नेतृत्व दुर्ग रेंज पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में किया गया। कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक डॉ. चित्रा वर्मा (नोडल अधिकारी), निरीक्षक पुष्पेंद्र भट्ट, एसआई यशवंत श्रीवास्तव, आरक्षक सुरेंद्र कटरे, आवेश खान, कामेश्वर देशमुख और विक्रम सिंह राजपूत की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस की अपील दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि बीमा पॉलिसी रिफंड, लॉटरी, सरकारी योजना या किसी भी प्रकार के इनाम के नाम पर आने वाले अनजान कॉल, लिंक या मैसेज पर भरोसा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर थाना या साइबर हेल्पलाइन को दें। दुर्ग पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश भी तेज कर दी गई है। Post navigation धमतरी में मां ने छोटे बेटे के साथ मिलकर बड़े बेटे की हत्या की, आत्महत्या दिखाने की कोशिश नाकाम दुर्ग में दो नाबालिग बहनों के साथ यौन अपराध, पुलिस ने शुरू की कार्रवाई…