GPM में इंसानियत शर्मसार : 22 साल के बेटे के शव को 35 KM तक ढोता रहा आदिवासी परिवार

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। जिले में सिस्टम की संवेदनहीनता की दर्दनाक तस्वीर सामने आई है। विशेषरा गांव के आदिवासी पिता ज्ञान सिंह गोंड को अपने 22 वर्षीय बेटे कमलेश गोंड के शव को ऑटो के पायदान पर रखकर अस्पताल ले जाना पड़ा।

कमलेश मानसिक बीमारी से पीड़ित था और झाड़-फूंक के दौरान उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पोस्टमार्टम के लिए परिजन पुलिस और अस्पताल से गाड़ी मांगते रहे, लेकिन कहीं से मदद नहीं मिली।

मजबूरी में परिवार ने ₹2 हजार देकर निजी ऑटो किराए पर लिया। ऑटो में जगह नहीं होने के कारण शव को पायदान पर रखकर करीब 20 किलोमीटर दूर अस्पताल ले जाया गया। पोस्टमार्टम के बाद भी शव वाहन नहीं मिला, इसलिए उसी ऑटो से 15 किलोमीटर दूर गांव लौटना पड़ा।

रास्ते भर शव का हिस्सा बाहर लटकता रहा। जिसने भी यह दृश्य देखा, उसका दिल दहल गया।

पीड़ित पिता ने कहा,
“कोई गाड़ी नहीं मिली… मजबूरी में बेटे का शव ऑटो में ले जाना पड़ा।”

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