रायपुर। IPL मैच देखने का उत्साह लेकर लखनऊ के इकाना स्टेडियम पहुंचे एक युवक को क्या पता था कि कुछ ही मिनटों में उसके साथ हजार रुपए की ठगी होने वाली है। मैच शुरू होने से पहले स्टेडियम के बाहर मौजूद कुछ युवकों ने उससे संपर्क किया और कहा कि उनके पास एक्स्ट्रा टिकट है।

युवक ने भरोसा किया और दो टिकट खरीद लिए। पैसे UPI से ट्रांसफर किए गए, लेकिन अंदर एंट्री के दौरान स्कैनिंग मशीन ने टिकट को फर्जी बता दिया। इसके बाद युवक सीधे पुलिस के पास पहुंचा और यहीं से पूरे मामले का खुलासा शुरू हुआ।

UPI पेमेंट बना पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग

शिकायत मिलते ही लखनऊ की साइबर सेल और सुशांत गोल्फ सिटी थाना एक्टिव हो गया। पुलिस ने सबसे पहले उस UPI ट्रांजैक्शन को ट्रैक किया, जिससे टिकट के पैसे लिए गए थे।

डिजिटल लोकेशन और मोबाइल डिटेल के आधार पर पुलिस ने कुछ ही घंटों में चार युवकों को हिरासत में ले लिया। गिरफ्तार युवक छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के रहने वाले बताए जा रहे हैं। इनमें श्रीकांत बोरकर, नूतन कुमार साहू, राजेंद्र चौधरी और विश्वजीत साहू शामिल हैं।

सोशल मीडिया से डाउनलोड करते थे असली टिकट की फोटो

जांच में सामने आया कि आरोपी पहले इंटरनेट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से असली IPL टिकटों की तस्वीरें निकालते थे। फिर उन्हें कंप्यूटर पर एडिट कर नई टिकट तैयार की जाती थी।

टिकट की डिजाइन इतनी मिलती-जुलती थी कि पहली नजर में असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता था। आरोपियों ने टिकट का साइज, रंग और लेआउट मैच करने के लिए डिजाइनिंग सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया।

AI टूल्स से ली डिजाइन और प्रिंटिंग की जानकारी

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपी ऑनलाइन AI टूल्स और इंटरनेट की मदद से टिकट प्रिंटिंग की जानकारी जुटा रहे थे। किस तरह का पेपर इस्तेमाल होता है, डिजाइन का फॉर्मेट कैसा होता है और टिकट को असली जैसा कैसे दिखाना है — इसके लिए उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म का सहारा लिया।

गिरोह का सदस्य विश्वजीत साहू डिजाइनिंग जानता था। उसने यूट्यूब वीडियो देखकर 2D और 3D डिजाइनिंग सीखी थी। इसी स्किल का इस्तेमाल कर फर्जी टिकट तैयार किए जा रहे थे।

जल्दी पैसा कमाने के लालच में रची पूरी साजिश

पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि आर्थिक परेशानी और जल्दी पैसा कमाने की चाह में उन्होंने यह रास्ता चुना।

गिरोह का मास्टरमाइंड श्रीकांत बोरकर बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, वह पहले कार वॉशिंग का काम करता था। बाकी आरोपी भी छोटे-मोटे काम करते थे, लेकिन IPL मैच की भीड़ को देखकर उन्होंने नकली टिकट बेचने का प्लान बनाया।

दिल्ली में नहीं चले, लखनऊ में आजमाया दांव

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पहले दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम के बाहर भी टिकट बेचने की कोशिश कर चुके थे। वहां उन्हें सफलता नहीं मिली।

इसके बाद उन्होंने टिकट की प्रिंट क्वालिटी और डिजाइन में बदलाव किया और फिर लखनऊ में IPL मैच के दौरान लोगों को निशाना बनाया।

पुलिस ने बरामद किए फर्जी टिकट और उपकरण

कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से 15 फर्जी IPL टिकट, 14 प्रिंटेड टिकट शीट, एक ASUS लैपटॉप, चार मोबाइल फोन, प्रिंटिंग सामग्री, बैंक पासबुक, ATM कार्ड और CG नंबर की एक कार जब्त की है।

फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह गिरोह सिर्फ IPL टिकट तक सीमित था या दूसरे बड़े इवेंट्स में भी इसी तरह की ठगी कर चुका है।

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