दुर्ग। जिले के कुम्हारी के महामाया पारा में हुए भीषण अग्निकांड मामले में प्रशासन ने जांच तेज कर दी है। मामले की जांच के लिए बनाई गई 6 सदस्यीय कमेटी को 16 मई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। CCTV फुटेज सामने आने के बाद हादसे की जांच अब नए एंगल से की जा रही है।

यह हादसा 12 मई की दोपहर करीब 3:30 बजे हुआ था। अनिल वैष्णव के घर में अचानक आग लग गई थी। कुछ ही देर में आग किचन तक पहुंची और गैस सिलेंडर ब्लास्ट हो गया। धमाका इतना तेज था कि घर के अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला।

हादसे में अनिल वैष्णव, उसकी दिव्यांग बेटी लक्ष्मी, दूसरी बेटी चांदनी और डेढ़ साल की मासूम गोपिका की जिंदा जलकर मौत हो गई। वहीं अनिल की पत्नी गिरजा, बेटा गौतम, बेटी भारती और पिता राधेश्याम उस समय घर से बाहर थे, जिससे उनकी जान बच गई।

घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। फुटेज में घर के अंदर से धुआं उठता दिखाई दे रहा है। आसपास के लोग पाइप और पानी लेकर आग बुझाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान अचानक सिलेंडर ब्लास्ट हो जाता है और लोग जान बचाकर भागते दिखाई देते हैं।

शुरुआती जांच में बिजली के खंभे में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की बात कही गई थी, लेकिन CCTV फुटेज में बिजली पोल से चिंगारी या आग निकलती नजर नहीं आई। इसके बाद जांच की दिशा बदल गई है।

मामले में अभिजीत सिंह ने 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। जांच की जिम्मेदारी मिलाई-3 के तहसीलदार एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी रवि विश्वकर्मा को सौंपी गई है।

जांच कमेटी में सेनानी नगर सेना दुर्ग नागेंद्र सिंह, मुख्य नगर पालिका अधिकारी कुम्हारी नेतराम चंद्राकर, थाना प्रभारी अम्बर सिंह भारद्वाज, वैज्ञानिक अधिकारी स्मिता भारद्वाज, मेडिकल ऑफिसर डॉ. अविनाश पाठक और विद्युत वितरण कंपनी के सहायक अभियंता विजय कुमार बंजारे शामिल हैं।

प्रशासन अब CCTV फुटेज, तकनीकी जांच और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आग लगने की असली वजह पता करने में जुटा है।

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