हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अमित जोगी को सरेंडर के निर्देश, चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सुनाया फैसला


बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में करीब 21 साल बाद बड़ा कानूनी मोड़ आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस मामले में आरोपी अमित जोगी को दोषी करार देते हुए 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया।


21 साल बाद फिर खुला केस

4 जून 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था।

31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

इसके बाद रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा, जिसके बाद अब यह बड़ा फैसला आया है।


जग्गी vs जोगी: राजनीतिक और साजिश का एंगल

रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे और छत्तीसगढ़ में NCP के कोषाध्यक्ष थे।

वहीं अमित जोगी, छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे हैं।

CBI की जांच में अमित जोगी सहित कई लोगों पर हत्या और आपराधिक साजिश रचने के आरोप लगाए गए थे। जांच में यह भी कहा गया था कि यह हत्या एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी, जिसमें राजनीतिक एंगल भी शामिल था।

हालांकि उस समय पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के कारण अमित जोगी को बरी कर दिया गया था, लेकिन केस दोबारा खुलने के बाद अब हाईकोर्ट ने उन्हें दोषी माना है।


CBI की 11 हजार पन्नों की रिपोर्ट

मामले में CBI ने करीब 11,000 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। इस रिपोर्ट में अमित जोगी की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप दर्ज किए गए थे।

इसी रिपोर्ट के आधार पर केस को दोबारा खोला गया और अब कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है।


दोषियों की सजा पहले ही बरकरार

हाईकोर्ट पहले ही इस मामले में दोषी ठहराए गए अन्य आरोपियों की अपील खारिज कर चुका है और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है।

इस हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, विक्रम शर्मा (मृत), जबवंत और विश्वनाथ राजभर को दोषी ठहराया गया था।

इनमें याहया ढेबर (रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई), शूटर चिमन सिंह, दो तत्कालीन CSP और एक थाना प्रभारी भी शामिल थे।


आगे क्या?

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब अमित जोगी को 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा। इसके बाद वे जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

करीब 21 साल पुराने इस मामले में आए इस फैसले ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की राजनीति और न्यायिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

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