“15 शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं”, खराब चावल और शिकायत दबाने के आरोपों से गरमाया माहौल

खाद्य अधिकारी हिमांशु केशरवानी पर शिकायत दबाने और मामले की लीपापोती के आरोप

पंडरिया। कबीरधाम जिले के पंडरिया ब्लॉक अंतर्गत मंझोली ग्राम पंचायत में मिड डे मील और राशन वितरण को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। लगातार शिकायतों के बाद अचानक बिना किसी सूचना के पंचायत पहुंचे खाद्य अधिकारी पर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने शिकायत दबाने और मामले की लीपापोती करने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों का कहना है कि स्कूलों में मध्यान्ह भोजन संचालित करने वाले समूह द्वारा लंबे समय से भारी अनियमितताएं की जा रही हैं। आरोप है कि बच्चों को तय मानक के अनुसार भोजन नहीं दिया जाता, वहीं भोजन की गुणवत्ता भी बेहद खराब रहती है। कई बार समूह के लोग स्कूल में ताजा भोजन बनाने की बजाय घर से खाना बनाकर लाते हैं और बच्चों को परोस देते हैं।

“करीब 15 बार शिकायत की, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई”

पंचायत प्रतिनिधियों ने बताया कि इस पूरे मामले में पंचायत की ओर से करीब 15 बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन खाद्य विभाग द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि हर बार मामले को दबाने की कोशिश की जाती रही।

ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतों के बाद खाद्य अधिकारी हिमांशु केशरवानी अचानक बिना किसी पूर्व सूचना के ग्राम पंचायत पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने सोसायटी के सेल्समैन और समूह से जुड़े लोगों को एकत्र कर शिकायत को कमजोर करने और मामले को “सामान्य” दिखाने का प्रयास किया।

शिकायत रिपोर्ट को लेकर बढ़ा विवाद

जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि मौके पर शिकायत से जुड़ी रिपोर्ट इस तरह तैयार की जा रही थी, जिसमें यह दिखाया जाए कि शिकायत में कोई बड़ी गड़बड़ी या आपत्ति नहीं मिली। इसी बात को लेकर पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी आमने-सामने आ गए।

मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने भी अधिकारियों के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिकायतें झूठी थीं तो अब तक जांच और कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

“जानवर भी न खाए ऐसा चावल बांटा जा रहा”

सोसायटी के सेल्समैन पर ग्रामीणों से बदसलूकी करने और खराब गुणवत्ता का चावल वितरण करने के आरोप भी लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बेहद खराब और सड़ा स्तर का चावल गरीब परिवारों को बांटा जा रहा है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अच्छे गुणवत्ता वाले चावल को अलग कर दिया जाता है, जबकि खराब चावल ग्रामीणों के हिस्से में आता है। इसे लेकर पंचायत प्रतिनिधियों ने अधिकारियों के सामने कड़ी नाराजगी जताई।

इमरान और जनप्रतिनिधियों के बीच जमकर बहस

मामले को लेकर इमरान और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच जमकर बहस हुई। आरोप है कि अधिकारी पूरे मामले को शांत कर आरोपों को खारिज करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जनप्रतिनिधियों ने इसका विरोध किया।

जनप्रतिनिधि इरशाद खान ने मामले में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीणों के साथ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

अधिकारी बोले- जांच में नहीं मिली गड़बड़ी

वहीं खाद्य विभाग की ओर से मौके पर कहा गया कि जांच के दौरान किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता सामने नहीं आई। हालांकि अधिकारी के इस बयान से ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधि संतुष्ट नजर नहीं आए।

इस मामले में हमारी टीम ने खाद्य विभाग के संबंधित अधिकारी से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।

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