6 बार विधायक रहे वीडी सतीशन अब संभालेंगे राज्य की कमान

नई दिल्ली। केरल की राजनीति में करीब 10 दिनों से चल रहा सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया। लंबे मंथन, कई दौर की बैठकों और दिल्ली दरबार में चली हाईलेवल चर्चाओं के बाद कांग्रेस ने गुरुवार को वीडी सतीशन के नाम पर मुहर लगा दी। अब वही केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे।

जैसे ही उनके नाम का ऐलान हुआ, कांग्रेस दफ्तरों में जश्न शुरू हो गया। समर्थकों ने मिठाइयां बांटी, ढोल-नगाड़े बजे और कार्यकर्ताओं ने इसे “नई शुरुआत” बताया।

इस बड़े फैसले की घोषणा कांग्रेस के केंद्रीय पर्यवेक्षकों अजय माकन, मुकुल वासनिक और केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। बताया जा रहा है कि अंतिम फैसला कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के साथ हुई अहम बैठक के बाद लिया गया।

मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए तीन बड़े चेहरे मैदान में

केरल में मुख्यमंत्री पद की रेस काफी दिलचस्प मानी जा रही थी। वीडी सतीशन के अलावा केसी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला का नाम भी सबसे आगे चल रहा था।

दिल्ली में कई दिनों तक चली चर्चाओं के बाद आखिर कांग्रेस नेतृत्व ने सतीशन को सबसे मजबूत विकल्प माना। पार्टी सूत्रों की मानें तो संगठन और जनता के बीच उनकी पकड़ ने उन्हें बाकी दावेदारों पर भारी बना दिया।

कौन हैं वीडी सतीशन?

वीडी सतीशन कांग्रेस के उन नेताओं में गिने जाते हैं जिन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत कर संगठन में लंबा सफर तय किया।

उनका जन्म 1964 में कोच्चि के पास नेटूर में हुआ था। पेशे से वे वकील और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने केरल छात्र संघ यानी केएसयू से राजनीति में कदम रखा और धीरे-धीरे कांग्रेस के बड़े चेहरों में शामिल हो गए।

सतीशन पिछले 25 साल से परवूर विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। साल 2001 में पहली बार विधायक बने और तब से लगातार छह चुनाव जीत चुके हैं।

हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने सीपीआई उम्मीदवार ईटी टायसन मास्टर को 20 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। उन्हें इस चुनाव में 78 हजार से ज्यादा वोट मिले।

विपक्ष के तेज चेहरे से मुख्यमंत्री तक का सफर

2021 में कांग्रेस ने वीडी सतीशन को केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया था। उसके बाद उन्होंने राज्य सरकार के खिलाफ कई मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाया और खुद को मजबूत विपक्षी नेता के तौर पर स्थापित किया।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि उनकी साफ छवि, संगठन पर पकड़ और जमीनी राजनीति ने कांग्रेस नेतृत्व को प्रभावित किया। यही वजह रही कि आखिरकार पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए उन्हीं पर भरोसा जताया।

यूडीएफ की ऐतिहासिक जीत के बाद बढ़ा था दबाव

इस बार केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ ने जबरदस्त प्रदर्शन किया। 140 सीटों वाली विधानसभा में गठबंधन ने 102 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया।

इनमें कांग्रेस को अकेले 63 सीटें मिलीं। वहीं आईयूएमएल को 22, केरल कांग्रेस को 8 और आरएसपी को 3 सीटें मिलीं।

इतनी बड़ी जीत के बावजूद मुख्यमंत्री के नाम के ऐलान में हुई देरी ने पार्टी के अंदर और बाहर दोनों जगह सवाल खड़े कर दिए थे।

देरी पर पार्टी के भीतर भी उठा विवाद

मुख्यमंत्री के नाम में देरी को लेकर विपक्ष लगातार कांग्रेस पर निशाना साध रहा था। वहीं पार्टी के भीतर भी नाराजगी सामने आने लगी थी।

वायनाड में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ पोस्टर लगाए गए। इनमें आरोप लगाया गया कि केंद्रीय नेतृत्व किसी खास चेहरे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

हालांकि, अब सतीशन के नाम के ऐलान के साथ कांग्रेस ने इस विवाद पर विराम लगाने की कोशिश की है।

अब सबसे बड़ा सवाल क्या?

वीडी सतीशन के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती इतनी बड़ी जीत को मजबूत सरकार में बदलने की होगी। जनता ने कांग्रेस गठबंधन को भारी बहुमत देकर सत्ता सौंपी है, ऐसे में लोगों की उम्मीदें भी काफी बढ़ चुकी हैं।

राज्य में बेरोजगारी, विकास, बुनियादी सुविधाएं और राजनीतिक संतुलन जैसे मुद्दों पर उनकी सरकार की पहली परीक्षा होगी।

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