प्रमोशन के खेल पर हाईकोर्ट की सख्ती! पुलिस विभाग में मचा हड़कंप, अंतिम आदेश पर रोक बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश में चल रही पुलिस कॉन्स्टेबल प्रमोशन प्रक्रिया पर बड़ा अंतरिम आदेश जारी करते हुए अंतिम पदोन्नति आदेशों पर रोक लगा दी है। जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने कहा है कि विभागीय प्रक्रिया जारी रह सकती है, लेकिन अगली सुनवाई तक किसी भी प्रकार का अंतिम प्रमोशन आदेश जारी नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 15 जून को तय की गई है। यह आदेश 72 आरक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सामने आया है, जिससे पुलिस विभाग में हलचल मच गई है। ट्रांसफर कर प्रमोशन लेने का आरोप दरअसल, प्रदेश के कई जिलों में आरक्षकों से प्रधान आरक्षक पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया चल रही है। इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए कोरबा जिले के अलग-अलग थानों में पदस्थ आरक्षक लव कुमार पात्रे, भूपेंद्र कुमार पटेल, विक्रम सिंह शांडिल्य समेत कुल 73 पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में राज्य शासन, गृह सचिव, डीजीपी, आईजी बिलासपुर रेंज और एसपी कोरबा सहित कई अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रमोशन प्रक्रिया में उन कर्मचारियों को भी वरिष्ठ मानकर लाभ दिया जा रहा है, जिन्होंने अपनी इच्छा से दूसरे जिलों में ट्रांसफर लिया था। नियमों की अनदेखी का दावा याचिका में कहा गया कि छत्तीसगढ़ पुलिस एग्जीक्यूटिव फोर्स कांस्टेबल भर्ती, पदोन्नति एवं सेवा शर्त नियम 2007 के संशोधन के अनुसार यदि कोई कर्मचारी स्वेच्छा से दूसरे जिले में ट्रांसफर लेता है, तो नए जिले की वरिष्ठता सूची में उसका नाम सबसे नीचे माना जाएगा। लेकिन वर्तमान प्रमोशन प्रक्रिया में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा। आरोप है कि कुछ कर्मचारी नवगठित जिलों में ट्रांसफर लेकर तेजी से प्रमोशन हासिल कर रहे हैं और बाद में दोबारा पुराने जिले में लौट आते हैं। 1 जून की फिट लिस्ट पर संकट याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट को बताया कि यदि समय रहते रोक नहीं लगाई जाती तो 1 जून 2026 को अंतिम फिट लिस्ट जारी हो जाती। इससे वर्षों से एक ही जिले में सेवा दे रहे आरक्षकों का हक प्रभावित होता। वहीं राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि कई याचिकाकर्ताओं के नाम भी फिट लिस्ट में शामिल हो सकते हैं और पुलिस मुख्यालय के स्पष्टीकरण पत्र को सीधे चुनौती नहीं दी गई है। हाईकोर्ट बोला- अंतिम आदेश नहीं होगा जारी दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामला सेवा नियमों के उल्लंघन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि विभागीय पदोन्नति समिति प्रक्रिया जारी रख सकती है, लेकिन हाईकोर्ट की अनुमति के बिना अंतिम प्रमोशन आदेश जारी नहीं होंगे। बिलासपुर संभाग में 795 जवान प्रमोशन के दावेदार आईजी कार्यालय के अनुसार बिलासपुर संभाग में कुल 795 आरक्षकों को प्रधान आरक्षक पद के लिए योग्य पाया गया है। जिलावार आंकड़े इस प्रकार हैं— बिलासपुर – 230 रायगढ़ – 230 कोरबा – 85 जांजगीर – 60 मुंगेली – 40 गौरेला-पेंड्रा-मरवाही – 40 सारंगढ़-बिलाईगढ़ – 60 सक्ती – 50 अब पूरे मामले पर पुलिस विभाग और हजारों जवानों की नजर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिक गई है। Post navigation सुप्रीम कोर्ट से पूर्व IAS अनिल टुटेजा को राहत, DMF घोटाला मामले में मिली जमानत X अकाउंट बैन होते ही भड़की ‘कॉकरोच जनता पार्टी’, संस्थापक अभिजीत दीपके बोले- “जैसा सोचा था, वैसा ही हुआ”