रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित DMF घोटाला मामले में पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के बाद उन्हें जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि आरोप गंभीर जरूर हैं, लेकिन इनकी सच्चाई का अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान ही होगा।

  • अनिल टुटेजा को 23 फरवरी 2026 को इस मामले में गिरफ्तार किया गया था।
  • वे इससे पहले 21 अप्रैल 2024 से न्यायिक हिरासत में थे।
  • कोर्ट ने माना कि मामले में 85 गवाह हैं और ट्रायल पूरा होने में लंबा समय लग सकता है।
  • सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है, जिसे भी कोर्ट ने ध्यान में रखा।

जमानत के साथ सख्त शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि टुटेजा अपनी पूर्व प्रशासनिक पकड़ के कारण गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से अदालत ने शर्त रखी कि रिहाई के बाद वे छत्तीसगढ़ से बाहर रहेंगे।

  • रिहाई के एक सप्ताह के भीतर निवास की जानकारी ACB और स्थानीय थाने को देनी होगी।
  • हर सुनवाई में अदालत में उपस्थित रहना होगा।
  • तय नियमों के अनुसार बॉन्ड जमा करने के बाद ही रिहाई मिलेगी।

क्या है DMF घोटाला मामला

DMF यानी डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड घोटाले में कोरबा जिले में 575 करोड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक गड़बड़ी का आरोप है। EOW और ACB ने ED की जांच रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज किया था।

जांच एजेंसियों के मुताबिक टेंडर आवंटन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं और कुछ ठेकेदारों व बिचौलियों को फायदा पहुंचाया गया। आरोप है कि कई परियोजनाओं में 25% से 40% तक कमीशन लिया गया।

जांच में यह भी सामने आया कि DMF फंड के नियमों में बदलाव कर मटेरियल सप्लाई, कृषि उपकरण, ट्रेनिंग और मेडिकल उपकरण जैसी कैटेगरी जोड़ी गईं, ताकि ज्यादा कमीशन वाले प्रोजेक्ट मंजूर किए जा सकें।

ED और ACB की जांच के दौरान लाखों रुपए नकद, बैंक खातों की जानकारी, फर्जी फर्मों से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए थे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *