बिलासपुर। सरकारी अस्पताल सिम्स में मरीजों से अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। एक मरीज के परिजन ने आरोप लगाया है कि एक्स-रे जल्दी कराने के बदले अस्पताल कर्मचारी ने 600 रुपए की मांग की। पैसे देने से इनकार करने पर उन्हें कई दिन बाद की तारीख दे दी गई।

मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में आया है। अधीक्षक ने जांच के आदेश देते हुए दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही है।

“पैसे दो तो तुरंत जांच, नहीं तो इंतजार करो”

जानकारी के मुताबिक कश्यप कॉलोनी निवासी अमर कश्यप अपने बीमार भाई अमन कश्यप को इलाज के लिए सिम्स लेकर पहुंचे थे। डॉक्टर ने जांच के बाद एक्स-रे कराने की सलाह दी और उन्हें रेडियोलॉजी विभाग भेजा गया।

परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद अमित नामक कर्मचारी ने उनसे 600 रुपए मांगे। कहा गया कि अस्पताल में जरूरी दवा उपलब्ध नहीं है, लेकिन पैसे देने पर व्यवस्था कर तुरंत एक्स-रे करा दिया जाएगा।

अमर कश्यप ने जब पैसे देने से मना किया तो कर्मचारी का व्यवहार बदल गया। आरोप है कि उन्हें 13 मई की तारीख देकर वापस भेज दिया गया और बाहर से दवा खरीदकर लाने को कहा गया।

गरीब मरीजों के साथ अन्याय का आरोप

घटना से नाराज परिजनों ने अस्पताल अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंप दी है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में गरीब और जरूरतमंद लोग मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर आते हैं, लेकिन यदि जांच और इलाज के लिए उनसे पैसे मांगे जाएं तो यह बेहद गंभीर मामला है।

परिजनों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

अस्पताल प्रबंधन ने दिए जांच के आदेश

सिम्स अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल में इलाज, जांच या दवा के नाम पर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली पूरी तरह प्रतिबंधित है।

उन्होंने साफ कहा कि यदि शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। साथ ही उसके पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे।

अस्पताल में पहले भी उठ चुके हैं सवाल

सिम्स जैसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों से पैसे मांगने के आरोप पहली बार सामने नहीं आए हैं। अक्सर मरीज और उनके परिजन जांच, स्ट्रेचर, दवा और भर्ती प्रक्रिया को लेकर कर्मचारियों पर मनमानी करने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि कार्रवाई के दावे हर बार होते हैं, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार नजर नहीं आता।

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